आसनसोल : शनिवार को आसनसोल शहर के जीटी रोड स्थित बाजार क्षेत्र में शुक्रवार को चलाए गए अतिक्रमण हटाओ अभियान को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक विवाद गहरा गया। अभियान से प्रभावित दुकानदारों की शिकायतों के बीच आसनसोल उत्तर विधानसभा क्षेत्र के विधायक कृष्णेंदु मुखोपाध्याय स्वयं बाजार पहुंचे और व्यापारियों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। उन्होंने कहा कि प्रभावित दुकानदारों की शिकायतों की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी तथा यदि किसी अधिकारी की भूमिका संदिग्ध पाई गई तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की मांग की जाएगी।
दुकानदारों ने विधायक के समक्ष आरोप लगाया कि नगर निगम द्वारा पूर्व में नोटिस जारी कर निर्धारित समय दिए जाने की बात कही गई थी, लेकिन समय सीमा पूरी होने से पहले ही अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी गई। उनका कहना था कि लगातार हो रही वर्षा के बीच अचानक अभियान चलाए जाने से उन्हें अपना सामान हटाने का पर्याप्त अवसर नहीं मिला, जिससे व्यापारियों को भारी आर्थिक क्षति उठानी पड़ी।
व्यापारियों ने बताया कि शुक्रवार को पुलिस बल की मौजूदगी में राहा लेन मोड़ से ईस्टर्न रेलवे बॉयज हाई स्कूल के सामने तक कई अस्थायी दुकानों और संरचनाओं को हटाया गया। इस दौरान कई दुकानदारों ने कार्रवाई का विरोध भी किया। बढ़ते विवाद के बीच विधायक कृष्णेंदु मुखोपाध्याय के हस्तक्षेप के बाद अभियान को तत्काल स्थगित कर दिया गया।
बाजार भ्रमण के दौरान विधायक ने व्यापारियों को आश्वस्त किया कि उनकी समस्याओं को राज्य सरकार और संबंधित विभागों के समक्ष प्रभावी ढंग से रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि किसी अधिकारी ने निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना कार्रवाई की है तो उसकी जवाबदेही तय की जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासनिक निर्णयों का पालन पारदर्शी और विधिसम्मत तरीके से होना आवश्यक है, ताकि आम नागरिकों और छोटे व्यापारियों के हित प्रभावित न हों।
पत्रकारों से बातचीत में विधायक ने कहा कि शहर को अतिक्रमण मुक्त बनाना आवश्यक है, किंतु ऐसी कार्रवाई मानवीय दृष्टिकोण और विधिक प्रक्रिया के अनुरूप होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि नगर निगम के कुछ अधिकारियों की कार्यशैली के कारण अनावश्यक विवाद की स्थिति उत्पन्न हुई है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच कर आवश्यक होने पर कानूनी कार्रवाई की मांग भी की।
उल्लेखनीय है कि गुरुवार को राज्य की नगर एवं शहरी विकास मंत्री अग्निमित्रा पाल ने नगर निगम कार्यालय में आयोजित जनसुनवाई कार्यक्रम के बाद जीटी रोड के बाजार क्षेत्र का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान उन्होंने पार्किंग क्षेत्र और फुटपाथों पर हुए अतिक्रमण पर चिंता व्यक्त करते हुए संबंधित अधिकारियों को नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद नगर निगम की ओर से नोटिस जारी कर अतिक्रमण हटाने के लिए समय सीमा निर्धारित की गई थी।
हालांकि, निर्धारित अवधि पूरी होने से पहले ही शुक्रवार को अभियान शुरू किए जाने से विवाद खड़ा हो गया। अब पूरे मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। नगर निगम प्रशासन का कहना है कि अभियान का उद्देश्य सार्वजनिक मार्गों को अतिक्रमण मुक्त कर यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाना है, जबकि प्रभावित व्यापारियों ने निष्पक्ष जांच और हुए नुकसान के उचित आकलन की मांग की है। फिलहाल पूरे घटनाक्रम पर प्रशासन की नजर बनी हुई है और आगे की कार्रवाई जांच रिपोर्ट के आधार पर किए जाने की संभावना है।

















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