आसनसोल : आसनसोल नगर निगम द्वारा बाजार क्षेत्र में चलाए गए अतिक्रमण हटाओ अभियान को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का सिलसिला रविवार को भी जारी रहा। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) की पश्चिम बर्धमान जिला इकाई ने अभियान की प्रक्रिया पर प्रश्न उठाते हुए प्रभावित हॉकरों के पुनर्वास, उचित मुआवजे तथा पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। पार्टी का कहना है कि कानून का पालन सुनिश्चित करना आवश्यक है, लेकिन इसके साथ मानवीय दृष्टिकोण अपनाना भी प्रशासन की जिम्मेदारी है।

पश्चिम बर्धमान जिला एआईएमआईएम अध्यक्ष दानिश अज़ीज़ ने जारी बयान में कहा कि बाजार क्षेत्र में की गई कार्रवाई से अनेक छोटे दुकानदारों और फुटपाथ पर व्यवसाय करने वाले हॉकरों की आजीविका प्रभावित हुई है। उनका आरोप है कि कई लोगों को अपना सामान सुरक्षित हटाने और वैकल्पिक व्यवस्था करने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल सका, जिसके कारण उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। उन्होंने कहा कि प्रशासन को पहले सभी प्रभावित लोगों को समुचित सूचना देकर निर्धारित समयसीमा उपलब्ध करानी चाहिए थी।
उन्होंने कहा कि किसी भी अतिक्रमण विरोधी अभियान का उद्देश्य केवल अवैध निर्माण हटाना नहीं होना चाहिए, बल्कि ऐसे लोगों के हितों की भी रक्षा करनी चाहिए, जिनकी आजीविका वर्षों से छोटे व्यवसायों पर निर्भर है। उनके अनुसार, यदि प्रशासन पुनर्वास की प्रभावी व्यवस्था करता, तो इस प्रकार की स्थिति उत्पन्न नहीं होती।
दानिश अज़ीज़ ने दावा किया कि कार्रवाई के दौरान कई हॉकरों का व्यापारिक सामान क्षतिग्रस्त हुआ, जिससे उनके सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने राज्य सरकार और नगर निगम से मांग की कि प्रभावित दुकानदारों के नुकसान का सर्वेक्षण कराया जाए तथा जिन लोगों को आर्थिक क्षति हुई है, उन्हें नियमानुसार उचित मुआवजा प्रदान किया जाए। साथ ही, उनके लिए वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराने की भी व्यवस्था की जाए, ताकि वे पुनः अपना व्यवसाय शुरू कर सकें।
एआईएमआईएम नेता ने पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष प्रशासनिक जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि अभियान निर्धारित नियमों और प्रक्रिया के अनुरूप संचालित किया गया या नहीं। उनका कहना है कि यदि कहीं प्रशासनिक स्तर पर त्रुटि हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि नगर निगम के जिन अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई की प्रक्रिया प्रारंभ की गई है, उनके संबंध में भी तथ्यों के आधार पर निष्पक्ष जांच आवश्यक है। किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी पक्षों को अपनी बात रखने का अवसर मिलना चाहिए।
उधर, प्रशासन का कहना है कि अतिक्रमण हटाने का उद्देश्य सार्वजनिक मार्गों को बाधामुक्त बनाना, पैदल यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना तथा यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखना है। वहीं, इस मुद्दे को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आने के बाद शहर में बहस तेज हो गई है। अब लोगों की निगाहें प्रशासन की आगामी कार्रवाई, जांच प्रक्रिया तथा प्रभावित हॉकरों के पुनर्वास संबंधी निर्णयों पर टिकी हैं।















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