आसनसोल : पश्चिम बंगाल की राजनीति में बुधवार को तृणमूल कांग्रेस के भीतर बढ़ती संगठनात्मक गतिविधियों और मतभेदों को लेकर चर्चाओं का दौर तेज रहा। पार्टी से जुड़े एक नए गुट ने राज्य के विभिन्न जिलों में संगठन विस्तार की प्रक्रिया को गति देते हुए कई नई नियुक्तियों की घोषणा की है। इसके बाद पश्चिम बर्धमान सहित कई जिलों में राजनीतिक हलचल बढ़ गई है। हालांकि, इस संबंध में तृणमूल कांग्रेस की आधिकारिक ओर से कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

नए गुट के नेतृत्व से जुड़े नेताओं ने दावा किया कि संगठन को जमीनी स्तर पर सशक्त बनाने के उद्देश्य से प्रदेश और जिला स्तर पर नई कार्यकारिणी गठित की जा रही है। इसी क्रम में पश्चिम बर्धमान के लिए नरेंद्रनाथ चक्रवर्ती को जिला अध्यक्ष नियुक्त किए जाने की घोषणा की गई। वहीं, प्रदेश स्तर की समिति में वरिष्ठ नेता अशोक रुद्र और पूर्व मेयर विधान उपाध्याय को भी महत्वपूर्ण दायित्व सौंपे जाने की जानकारी दी गई।
बुधवार को आयोजित संवाददाता सम्मेलन में वरिष्ठ नेता अशोक रुद्र ने संगठन की वर्तमान कार्यप्रणाली पर प्रश्न उठाते हुए कहा कि बड़ी संख्या में पुराने नेता और कार्यकर्ता उनके संपर्क में हैं। उन्होंने दावा किया कि आसनसोल तथा दुर्गापुर नगर निगम के अनेक पूर्व जनप्रतिनिधि इस नए संगठनात्मक अभियान से जुड़ने की इच्छा जता चुके हैं।
अशोक रुद्र ने कहा कि उनका उद्देश्य पार्टी की मूल विचारधारा और संगठनात्मक संस्कृति को मजबूत करना है। उन्होंने यह भी कहा कि वे स्वयं को तृणमूल कांग्रेस की मूल राजनीतिक धारा का हिस्सा मानते हैं तथा उनकी सर्वोच्च नेता ममता बनर्जी ही हैं। साथ ही उन्होंने संगठन के संचालन की वर्तमान शैली पर असहमति व्यक्त करते हुए कुछ रणनीतिक निर्णयों पर पुनर्विचार की आवश्यकता बताई।

संवाददाता सम्मेलन के दौरान उन्होंने चुनावी टिकट वितरण और संगठनात्मक नियुक्तियों की प्रक्रिया को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए। उनका आरोप था कि पूर्व में कई निर्णय पारदर्शी तरीके से नहीं लिए गए, जिससे संगठनात्मक असंतोष बढ़ा। उन्होंने कहा कि पार्टी को भविष्य में मजबूत बनाने के लिए निष्पक्ष, लोकतांत्रिक और पारदर्शी व्यवस्था अपनाना आवश्यक है।
नए गुट के नेताओं ने यह भी दावा किया कि आने वाले दिनों में राज्य के विभिन्न जिलों से अनेक नेता और कार्यकर्ता उनके साथ जुड़ सकते हैं। इसके साथ ही उन्होंने आगामी 21 जुलाई के शहीद दिवस कार्यक्रम को लेकर अपनी तैयारियों का भी उल्लेख किया और कहा कि संगठनात्मक स्तर पर व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाया जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के भीतर बढ़ती संगठनात्मक सक्रियता आने वाले समय में राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकती है। हालांकि, इन दावों और आरोपों पर संबंधित पक्षों की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है। फिलहाल पश्चिम बर्धमान सहित राज्य के कई जिलों में इन घटनाक्रमों को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हैं और सभी की नजरें आगामी राजनीतिक गतिविधियों पर टिकी हुई हैं।















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