कुल्टी : गुरुवार को कुल्टी विधानसभा क्षेत्र के बराकर स्थित प्राचीन श्रीश्री गौरांग मंदिर एवं मां अन्नपूर्णा भंडारा मंदिर में भगवान श्रीजगन्नाथ की पारंपरिक स्नानयात्रा श्रद्धा, आस्था और वैदिक रीति-विधानों के साथ संपन्न हुई। शताब्दी से भी अधिक समय से चली आ रही इस विशिष्ट धार्मिक परंपरा में भाग लेने के लिए पश्चिम बंगाल और झारखंड के विभिन्न क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालु मंदिर पहुंचे। पूरे दिन मंदिर परिसर में भक्ति, आध्यात्मिकता और उत्सव का अनुपम वातावरण बना रहा।

इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता इसकी अनूठी परंपरा है। जहां देश के अधिकांश जगन्नाथ मंदिरों में स्नानयात्रा रथयात्रा से पंद्रह दिन पूर्व आयोजित की जाती है, वहीं बराकर के इस ऐतिहासिक मंदिर में यह अनुष्ठान रथयात्रा से एक दिन पूर्व संपन्न कराया जाता है। लगभग 102 वर्षों से यह परंपरा बिना किसी व्यवधान के निरंतर निभाई जा रही है और आज भी श्रद्धालुओं के लिए गहन आस्था का केंद्र बनी हुई है।
प्रातःकाल से ही श्रद्धालुओं का मंदिर में आगमन प्रारंभ हो गया था। आसनसोल, दुर्गापुर, पुरुलिया, कोलकाता तथा झारखंड के अनेक जिलों से पहुंचे भक्तों ने भगवान श्रीजगन्नाथ के दर्शन कर पूजा-अर्चना की तथा परिवार की सुख-समृद्धि एवं लोककल्याण की कामना की। मंदिर परिसर “जय जगन्नाथ” के उद्घोष और भजन-कीर्तन से देर तक गुंजायमान रहा।
मंदिर के सेवायत हरेकृष्ण बाबा ने बताया कि स्नानयात्रा के अवसर पर भगवान श्रीजगन्नाथ का 120 प्रकार की पवित्र सामग्रियों से महाभिषेक किया गया। अभिषेक में विभिन्न तीर्थों का पवित्र जल, सप्तसागरों का जल, पावन स्थलों की मिट्टी, पंचामृत, घृत, मधु, दुग्ध, दधि, शर्करा तथा अन्य धार्मिक सामग्रियों का उपयोग किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार के मध्य संपन्न इस अनुष्ठान के उपरांत भगवान को विशेष रूप से अलंकृत कर रथ पर विराजमान किया गया।

हरेकृष्ण बाबा ने बताया कि शास्त्रीय परंपरा के अनुसार स्नानयात्रा के बाद भगवान जगन्नाथ विश्राम काल में रहते हैं और मंदिर के कपाट कुछ दिनों के लिए बंद किए जाते हैं। किंतु इस मंदिर में महाप्रभु, राधा-कृष्ण तथा मां अन्नपूर्णा की नित्य पूजा और भोग की परंपरा निरंतर चलती रहती है। इसी कारण पूर्व संत सीताराम बाबा के निर्देश पर वर्षों पहले यह निर्णय लिया गया था कि यहां स्नानयात्रा रथयात्रा से एक दिन पूर्व आयोजित की जाएगी। आज भी उसी परंपरा का श्रद्धापूर्वक पालन किया जा रहा है।
आयोजकों ने बताया कि इस वर्ष श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा, स्वच्छता और प्रसाद वितरण की विशेष व्यवस्था की गई थी। राज्य सरकार से प्राप्त सहयोग के कारण आयोजन को और अधिक सुव्यवस्थित एवं भव्य स्वरूप प्रदान किया जा सका।
श्रद्धालुओं ने इस प्राचीन धार्मिक परंपरा को क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर बताते हुए कहा कि बराकर की यह स्नानयात्रा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और सामाजिक समरसता का जीवंत प्रतीक है। यही कारण है कि प्रत्येक वर्ष हजारों श्रद्धालु यहां उपस्थित होकर भगवान श्रीजगन्नाथ का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।















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