सालानपुर : शनिवार को पश्चिम बर्द्धमान जिले के सालानपुर क्षेत्र स्थित ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल) की बंजेमिहारी ओपन कास्ट परियोजना में लगातार हो रही तीव्र विस्फोटक ब्लास्टिंग के विरोध में स्थानीय ग्रामीणों का आक्रोश फूट पड़ा। बंजेमिहारी न्यू कॉलोनी तथा आसपास के गांवों के सैकड़ों ग्रामीण खदान परिसर में पहुंच गए और कोयला उत्पादन तथा परिवहन कार्य पूरी तरह ठप कर दिया। लगभग दो घंटे तक चले इस विरोध प्रदर्शन के कारण खदान की गतिविधियां बाधित रहीं और प्रशासन को स्थिति संभालने के लिए हस्तक्षेप करना पड़ा।

ग्रामीणों का आरोप है कि खदान में प्रतिदिन होने वाली भारी ब्लास्टिंग से पूरा इलाका तेज कंपन महसूस करता है। कंपन के कारण अनेक मकानों की दीवारों में दरारें पड़ चुकी हैं तथा कई स्थानों पर भूमि धंसने की घटनाएं भी सामने आई हैं। लोगों का कहना है कि हर विस्फोट के समय ऐसा प्रतीत होता है मानो भूकंप आ गया हो। इससे बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों में भय का वातावरण व्याप्त है।
स्थानीय निवासी साधु शरण महतो ने बताया कि कई बार ईसीएल प्रबंधन और संबंधित अधिकारियों को लिखित शिकायत दी गई, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकाला गया। उनका कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में किसी बड़ी दुर्घटना से इनकार नहीं किया जा सकता।
एक अन्य ग्रामीण सचिन भुइयां ने कहा कि खदान के समीप भूमि धंसने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। यदि किसी दिन आवासीय क्षेत्र प्रभावित हुआ और जनहानि हुई तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जब तक प्रभावित क्षेत्रों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जाती, तब तक खदान में सामान्य कार्य नहीं होने दिया जाएगा।

ग्रामीणों के विरोध प्रदर्शन की सूचना मिलते ही ईसीएल के बंजेमिहारी परियोजना के एजेंट राजीव कुमार सिन्हा मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों से वार्ता की। उन्होंने आश्वासन दिया कि जहां भूमि धंसने की शिकायत मिली है, वहां तत्काल मिट्टी भराई का कार्य कराया जाएगा। इसके साथ ही पूरे क्षेत्र का तकनीकी सर्वेक्षण कर संभावित जोखिम का वैज्ञानिक आकलन कराया जाएगा।
उन्होंने बताया कि खदान में विस्फोट संबंधी सभी कार्य महानिदेशक खान सुरक्षा (डीजीएमएस) के निर्धारित मानकों के अनुरूप किए जाते हैं। इसके बावजूद ग्रामीणों की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए कंपन की वास्तविक तीव्रता मापने के लिए प्रभावित क्षेत्र में वाइब्रोमीटर स्थापित किया जाएगा, ताकि तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा सके।
ईसीएल अधिकारियों के आश्वासन के बाद ग्रामीणों ने फिलहाल अपना आंदोलन स्थगित कर दिया और खदान में कार्य पुनः प्रारंभ हो गया। हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि शीघ्र स्थायी समाधान नहीं निकाला गया तो वे भविष्य में और व्यापक आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे। यह घटनाक्रम एक बार फिर औद्योगिक विकास और जनसुरक्षा के बीच संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता को रेखांकित करता है।















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