आसनसोल : धार्मिक आस्था के प्रमुख केंद्र घाघुरबुड़ी मंदिर की पवित्रता और स्वच्छता बनाए रखने के उद्देश्य से प्रशासन ने बड़ा निर्णय लिया है। मंदिर परिसर को अब आधिकारिक रूप से ‘धूम्रपान निषेध क्षेत्र’ (नो स्मोकिंग जोन) घोषित किया गया है। राज्य की नगर विकास एवं नगर मामलों की मंत्री अग्निमित्रा पाल ने इस पहल की घोषणा करते हुए श्रद्धालुओं और आम लोगों से मंदिर की गरिमा बनाए रखने की अपील की।

मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि धार्मिक स्थलों का वातावरण शुद्ध, शांत और स्वच्छ रहना चाहिए। मंदिर परिसर में किसी भी प्रकार का धूम्रपान पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। यदि कोई व्यक्ति नियमों का उल्लंघन करता पाया जाता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कहा कि मंदिर केवल पूजा-अर्चना का स्थान नहीं, बल्कि लोगों की आस्था और विश्वास का केंद्र होता है। ऐसे स्थानों पर अनुशासन और स्वच्छता बनाए रखना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की कि वे धार्मिक स्थल की पवित्रता को बनाए रखने में प्रशासन का सहयोग करें।
इस दौरान मंत्री ने गुटखा, पान और अन्य तंबाकू उत्पादों के सेवन के बाद परिसर में थूकने की प्रवृत्ति पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि मंदिर परिसर में गंदगी फैलाने वालों को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। धार्मिक स्थलों को स्वच्छ रखना समाज के प्रत्येक व्यक्ति का नैतिक कर्तव्य है।
प्रशासन की ओर से बताया गया कि मंदिर परिसर में निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ जुर्माना सहित अन्य कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है। इसके लिए सुरक्षाकर्मियों और संबंधित अधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।

स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं ने इस निर्णय का स्वागत किया है। उनका कहना है कि घाघुरबुड़ी मंदिर क्षेत्र में बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्रतिदिन पहुंचते हैं। ऐसे में परिसर की स्वच्छता और धार्मिक वातावरण बनाए रखने के लिए इस तरह के कदम आवश्यक हैं।
पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि धार्मिक स्थलों पर स्वच्छता संबंधी नियमों को लागू करने से न केवल परिसर साफ रहेगा, बल्कि लोगों में सामाजिक जागरूकता भी बढ़ेगी। विशेषकर युवा वर्ग को स्वच्छता और स्वास्थ्य के प्रति सकारात्मक संदेश मिलेगा।
घाघुरबुड़ी मंदिर में लागू किया गया यह नियम आने वाले समय में अन्य धार्मिक स्थलों के लिए भी प्रेरणादायक उदाहरण बन सकता है। प्रशासन का उद्देश्य केवल प्रतिबंध लगाना नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं में जिम्मेदारी की भावना विकसित करना है।
आस्था और स्वच्छता के इस संगम से घाघुरबुड़ी मंदिर अब धार्मिक महत्व के साथ-साथ अनुशासन और पर्यावरण संरक्षण के संदेश का केंद्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।















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