अंडाल : पश्चिम बर्दवान जिले में रविवार को राजनीतिक गतिविधियां उस समय तेज हो गईं, जब भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं ने आसनसोल लोकसभा क्षेत्र के सांसद शत्रुघ्न सिन्हा की कथित अनुपस्थिति को मुद्दा बनाते हुए अंडाल थाना अंतर्गत उखड़ा पुलिस फाड़ी में उनके नाम पर सांकेतिक “गुमशुदगी शिकायत” दर्ज कराई। भाजपा ने इस प्रतीकात्मक कदम के माध्यम से आरोप लगाया कि सांसद लंबे समय से क्षेत्र में सक्रिय रूप से दिखाई नहीं दे रहे हैं और स्थानीय जनता से उनका सीधा संवाद लगभग समाप्त हो गया है।

भाजपा कार्यकर्ता दयाल चटर्जी के नेतृत्व में पार्टी के अनेक पदाधिकारी और समर्थक उखड़ा पुलिस फाड़ी पहुंचे। वहां उन्होंने सांकेतिक रूप से ज्ञापन सौंपते हुए अपनी नाराजगी व्यक्त की। कार्यकर्ताओं का कहना था कि लोकसभा चुनाव के बाद क्षेत्र की विभिन्न समस्याओं को लेकर नागरिक कई बार जनप्रतिनिधि से संपर्क करने का प्रयास कर चुके हैं, किंतु उन्हें अपेक्षित संवाद और उपस्थिति नहीं मिल रही है।
भाजपा नेताओं ने कहा कि जनप्रतिनिधि का दायित्व केवल चुनाव जीतना नहीं, बल्कि नियमित रूप से अपने संसदीय क्षेत्र में उपस्थित रहकर जनता की समस्याओं को सुनना और उनके समाधान के लिए प्रयास करना भी है। उनका आरोप है कि क्षेत्र में सड़क, पेयजल, आधारभूत सुविधाओं तथा अन्य विकास संबंधी विषयों पर लोगों की अनेक शिकायतें हैं, लेकिन इन मुद्दों पर सांसद की सक्रियता दिखाई नहीं दे रही है।
पार्टी नेताओं के अनुसार, सांकेतिक “गुमशुदगी शिकायत” का उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष का अपमान करना नहीं, बल्कि प्रशासन और जनता का ध्यान इस मुद्दे की ओर आकर्षित करना है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता को अपने निर्वाचित प्रतिनिधियों से संवाद और जवाबदेही की अपेक्षा होती है।
इस घटनाक्रम के बाद जिले के राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विपक्ष इस मुद्दे को आगामी दिनों में भी जनसंपर्क अभियान के माध्यम से उठाने का प्रयास कर सकता है। वहीं स्थानीय स्तर पर भी इस प्रतीकात्मक विरोध प्रदर्शन को लेकर विभिन्न प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

हालांकि, समाचार लिखे जाने तक तृणमूल कांग्रेस अथवा सांसद शत्रुघ्न सिन्हा की ओर से भाजपा के आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया जारी नहीं की गई थी। इसलिए भाजपा द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों को जनहित से जुड़े मुद्दों पर संवाद बनाए रखना चाहिए। यदि किसी पक्ष की ओर से आरोप लगाए जाते हैं, तो उनका तथ्यात्मक उत्तर और आवश्यक स्पष्टीकरण भी लोकतांत्रिक परंपराओं का हिस्सा माना जाता है।
अब स्थानीय राजनीतिक हलकों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि इस सांकेतिक विरोध के बाद संबंधित पक्ष की ओर से क्या प्रतिक्रिया आती है और क्षेत्र के विकास तथा जनसंपर्क से जुड़े मुद्दों पर आगे किस प्रकार की पहल की जाती है। यह घटनाक्रम आने वाले दिनों में पश्चिम बर्दवान की राजनीति में चर्चा का प्रमुख विषय बना रह सकता है।














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