आसनसोल : पश्चिम बर्द्धमान जिले के अंडाल थाना क्षेत्र के नीलकंठ मंदिर के समीप धोबापाड़ा इलाके में बुधवार को हुई भू-धंसान की घटना से पूरे क्षेत्र में भय का वातावरण बन गया। अचानक तेज आवाज के साथ जमीन धंसने और कंपन महसूस होने के बाद स्थानीय लोग अपने घरों से बाहर निकल आए।

स्थानीय लोगों के अनुसार, घटना इतनी अचानक हुई कि लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। जमीन के अंदर से तेज धमाके जैसी आवाज सुनाई दी और देखते ही देखते कई घरों की दीवारों तथा फर्श में दरारें पड़ने लगीं। घटना के बाद इलाके के लोगों में अफरा-तफरी मच गई और बड़ी संख्या में लोग सुरक्षित स्थानों की ओर चले गए।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, धोबापाड़ा क्षेत्र में करीब सौ से अधिक मकानों में दरारें आई हैं। कई स्थानों पर जमीन धंसने की स्थिति भी देखी गई है। इस घटना से लगभग एक हजार से अधिक लोगों के प्रभावित होने की बात सामने आ रही है। प्रशासन ने सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रभावित परिवारों को तत्काल घर खाली करने का निर्देश दिया।
घटना की सूचना मिलते ही अंडाल थाना पुलिस, उखड़ा पुलिस चौकी, जिला प्रशासन और ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल) के अधिकारी मौके पर पहुंचे। प्रशासन की ओर से पूरे इलाके की निगरानी शुरू कर दी गई है। पुलिस ने माइकिंग कर लोगों से सतर्क रहने और जोखिम वाले मकानों में नहीं रहने की अपील की।
प्रभावित परिवारों का कहना है कि उनके घरों में अभी भी जरूरी सामान रखा हुआ है, लेकिन सुरक्षा कारणों से उन्हें वापस जाने की अनुमति नहीं दी जा रही है। अचानक घर छोड़ने के कारण कई परिवारों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। फिलहाल लोगों को सुरक्षित स्थान पर रखा गया है, जहां प्रशासन की ओर से आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।
स्थानीय निवासियों ने बताया कि क्षेत्र में पहले भी भू-धंसान की घटनाएं सामने आती रही हैं। उनका आरोप है कि लंबे समय से इलाके में जमीन के नीचे होने वाली गतिविधियों को लेकर चिंता बनी हुई थी। बरसात के मौसम में खतरा और बढ़ जाता है। इस घटना के बाद लोगों में स्थायी पुनर्वास को लेकर मांग तेज हो गई है।

वहीं, ईसीएल की तकनीकी टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण शुरू कर दिया है। अधिकारियों की ओर से जमीन धंसने के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा रहा है। प्रारंभिक तौर पर आशंका जताई जा रही है कि भूमिगत कोयला खनन के कारण जमीन के नीचे खाली स्थान बनने से यह स्थिति उत्पन्न हुई हो सकती है। हालांकि, जांच पूरी होने के बाद ही वास्तविक कारण स्पष्ट हो पाएगा।
जिला प्रशासन ने प्रभावित लोगों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए आवश्यक कदम उठाने की बात कही है। अधिकारियों के अनुसार, स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और प्रभावित परिवारों के पुनर्वास को लेकर भी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
अंडाल की यह घटना एक बार फिर कोयला क्षेत्र में रहने वाले लोगों की सुरक्षा और पुनर्वास के मुद्दे को सामने ले आई है। अब सभी की नजर ईसीएल और प्रशासन की जांच रिपोर्ट तथा आगे की कार्रवाई पर टिकी हुई है।














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