रानीगंज : गुरुवार को पश्चिम बर्दवान जिले के रानीगंज में महापंडित राहुल सांकृत्यायन की प्रतिमा हटाए जाने के विरोध में वामपंथी संगठनों ने व्यापक विरोध-प्रदर्शन किया। जनवादी लेखक संघ, पश्चिम बंग लोकतांत्रिक लेखक संघ तथा अन्य प्रगतिशील संगठनों के संयुक्त आह्वान पर आयोजित विरोध मार्च के दौरान कुछ समय के लिए राजनीतिक तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई। पुलिस ने त्वरित हस्तक्षेप कर स्थिति को नियंत्रित किया और किसी भी अप्रिय घटना को टाल दिया।
प्रदर्शनकारियों का जुलूस शिशु बागान मोड़ से प्रारंभ होकर रामभगवान मोड़ के रास्ते पंजाबी मोड़ पहुंचा, जहां वर्ष 1993 में स्थापित महापंडित राहुल सांकृत्यायन की प्रतिमा पूर्व में स्थित थी। प्रदर्शनकारियों ने उसी स्थान पर धरना देकर प्रतिमा को पुनः स्थापित करने, घटना की निष्पक्ष जांच कराने तथा दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की।
धरना स्थल के समीप भारतीय जनता पार्टी के विधायक कार्यालय के निर्माण कार्य के दौरान दोनों पक्षों के समर्थकों के बीच पहले तीखी नारेबाजी हुई। इसके बाद कुछ समय के लिए वातावरण तनावपूर्ण हो गया। हालांकि पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने तत्काल हस्तक्षेप करते हुए दोनों पक्षों को अलग किया और कानून-व्यवस्था बनाए रखी। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया तथा संवेदनशील स्थानों पर निगरानी बढ़ा दी गई।
भारतीय जनता पार्टी के रानीगंज विधायक पार्थ घोष ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में प्रत्येक नागरिक और संगठन को शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखने का अधिकार है, किंतु विरोध के नाम पर किसी भी संवैधानिक पद अथवा राजनीतिक दल के विरुद्ध आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ संगठन राजनीतिक प्रासंगिकता बनाए रखने के उद्देश्य से इस मुद्दे को अनावश्यक रूप से तूल दे रहे हैं।
वहीं, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के पश्चिम बर्दवान जिला सचिव गौरांग चट्टोपाध्याय ने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक आंदोलन में व्यवधान डालने का प्रयास किया गया। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन के दौरान सभा की ध्वनि व्यवस्था बाधित करने तथा आंदोलन को सीमित करने की कोशिश की गई। उनका कहना था कि प्रतिमा हटाए जाने की घटना की निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है और दोषियों की पहचान कर उनके विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई की जानी चाहिए।
प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि राहुल सांकृत्यायन की प्रतिमा को उसी स्थान पर पुनर्स्थापित किया जाए तथा सांस्कृतिक विरासत से जुड़े स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्थायी व्यवस्था की जाए। उनका कहना था कि साहित्य, इतिहास और सामाजिक चेतना से जुड़े महापुरुषों का सम्मान समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि पूरे घटनाक्रम की जानकारी एकत्र की जा रही है। यदि किसी पक्ष की ओर से लिखित शिकायत प्राप्त होती है अथवा जांच में कानून उल्लंघन के प्रमाण मिलते हैं, तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल क्षेत्र में शांति बनी हुई है और प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है।
















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