बंद खदानों से थमी आसनसोल की अर्थव्यवस्था, 15 हजार परिवारों की रोजी-रोटी पर संकट गहराया

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आसनसोल :  पश्चिम बर्दवान जिले के आसनसोल अंचल में वर्षों से बंद पड़ी काले पत्थर की खदानों को फिर से खोलने की मांग अब तेज होती जा रही है। खनन उद्योग से जुड़े श्रमिकों, व्यापारिक संगठनों और स्थानीय लोगों का कहना है कि खदानों के बंद रहने से रोजगार के साथ क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियां भी प्रभावित हुई हैं। इस बीच आसनसोल चैंबर ऑफ कॉमर्स ने राज्य सरकार से मामले में तत्काल पहल करने की मांग की है।

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चैंबर के पदाधिकारी शंभुनाथ झा ने राज्य सरकार को पत्र भेजकर बंद खदानों को निर्धारित कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी करने के बाद पुनः शुरू कराने का आग्रह किया है। उनका कहना है कि काले पत्थर का खनन उद्योग आसनसोल और आसपास के क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है।

हजारों परिवारों की आजीविका प्रभावित

शंभुनाथ झा के अनुसार, इस उद्योग से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से करीब 15 हजार श्रमिक तथा उनके परिवार जुड़े हुए हैं। लंबे समय से खदानें बंद होने के कारण बड़ी संख्या में श्रमिकों के सामने रोजगार का संकट पैदा हो गया है। खनन, परिवहन, पत्थर प्रसंस्करण और निर्माण क्षेत्र से जुड़े अनेक लोगों की आय पर भी इसका असर पड़ा है।

चैंबर का कहना है कि खदानों के पुनः संचालन से केवल श्रमिकों को रोजगार ही नहीं मिलेगा, बल्कि इससे परिवहन, निर्माण सामग्री, छोटे व्यवसाय और अन्य सहायक कारोबारों को भी गति मिल सकती है।

सरकार को राजस्व का भी नुकसान

व्यापारिक संगठन के अनुसार, खदानों के बंद रहने से राज्य सरकार को संभावित राजस्व से भी वंचित होना पड़ रहा है। वहीं आसनसोल अंचल में चल रही विभिन्न निर्माण एवं आधारभूत संरचना परियोजनाओं के लिए काले पत्थर की मांग बनी हुई है।

पत्र में दावा किया गया है कि वर्तमान में पड़ोसी झारखंड से बड़ी मात्रा में पत्थर की चिप्स यहां पहुंच रही हैं। चैंबर का आरोप है कि यदि स्थानीय खदानों का वैध संचालन शुरू हो जाए तो क्षेत्र की मांग स्थानीय स्तर पर पूरी हो सकती है और राज्य के भीतर रोजगार तथा राजस्व दोनों बढ़ सकते हैं।

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औद्योगिक गतिविधियों को मिल सकती है रफ्तार

शंभुनाथ झा ने राज्य सरकार से आग्रह किया कि आसनसोल अंचल की बंद खदानों की स्थिति की समीक्षा कर आवश्यक अनुमति, पर्यावरणीय प्रावधान और अन्य कानूनी औपचारिकताएं पूरी कराने की दिशा में कदम उठाए जाएं।

चैंबर का मानना है कि खदानें फिर खुलने से हजारों लोगों को रोजगार मिलेगा, निर्माण उद्योग को आवश्यक कच्चा माल उपलब्ध होगा, परिवहन कारोबार को बढ़ावा मिलेगा और सरकारी राजस्व में वृद्धि हो सकती है।

व्यापारिक संगठन ने उम्मीद जताई है कि राज्य सरकार इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभागों के साथ समन्वय कर जल्द समाधान निकालेगी। अब नजर इस बात पर है कि वर्षों से बंद खदानों के पुनरुद्धार को लेकर सरकार की ओर से क्या कदम उठाया जाता है।

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