पानागढ़ : रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती देने वाली घटना ने रेल प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। गलसी स्टेशन के समीप रेलवे के संकेत एवं दूरसंचार तंत्र में उपयोग होने वाली सामग्री को अवैध रूप से ले जाने का मामला सामने आया है। आरपीएफ ने त्वरित कार्रवाई करते हुए एक युवक को गिरफ्तार किया है। बरामद सामग्री की अनुमानित कीमत करीब 1.25 लाख रुपये बताई जा रही है।
जानकारी के अनुसार, आरपीएफ को गुप्त सूचना मिली थी कि गलसी स्टेशन के आसपास से रेलवे में प्रयुक्त महत्वपूर्ण सामग्री एक वाहन के माध्यम से बाहर ले जाई जा रही है। सूचना को गंभीरता से लेते हुए आरपीएफ और गलसी पुलिस ने संयुक्त रूप से कार्रवाई शुरू की। इसी क्रम में एक नीले रंग के महिंद्रा अल्फा प्लस टेंपो को रोककर उसकी तलाशी ली गई।
तलाशी के दौरान वाहन से रेलवे के संकेत एवं दूरसंचार तंत्र से संबंधित बड़ी मात्रा में सामग्री बरामद हुई। अधिकारियों के अनुसार, इसमें करीब 60 रेलवे सिग्नल रिले, 60 कोर तथा सिग्नल और दूरसंचार केबल शामिल हैं। बरामद सामग्री की कुल अनुमानित कीमत लगभग 1.25 लाख रुपये आंकी गई है।
मामले में आरपीएफ ने 23 वर्षीय बिक्रम दास को गिरफ्तार किया। पूछताछ के दौरान वह बरामद रेलवे सामग्री से संबंधित कोई वैध दस्तावेज अथवा अनुमति प्रस्तुत नहीं कर सका। इसके बाद पुलिस और आरपीएफ ने मामले को गंभीरता से लेते हुए उससे पूछताछ शुरू की।
प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने कथित तौर पर बताया कि उसे किसी अन्य व्यक्ति ने गलसी से बर्दवान तक सामग्री पहुंचाने के लिए टेंपो उपलब्ध कराया था। हालांकि, बरामद सामग्री उसे किसने दी और उसे रेलवे क्षेत्र से बाहर कैसे निकाला गया, इस संबंध में जांच जारी है।
इस घटना ने रेलवे सुरक्षा को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। रेलवे संकेत और दूरसंचार व्यवस्था से जुड़ी सामग्री ट्रेनों के सुरक्षित संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ऐसे में इस प्रकार की सामग्री का अनधिकृत रूप से बाहर जाना सुरक्षा की दृष्टि से गंभीर विषय माना जा रहा है।
आरपीएफ अब यह पता लगाने में जुटी है कि बरामद सामग्री रेलवे परिसर से किस माध्यम से बाहर पहुंची। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि इस मामले में किसी अन्य व्यक्ति अथवा संगठित गिरोह की भूमिका तो नहीं है।
जांच एजेंसियां वाहन के स्वामित्व, सामग्री के स्रोत और उसके संभावित गंतव्य की भी पड़ताल कर रही हैं। पुलिस को आशंका है कि गिरफ्तार युवक के पीछे अन्य लोग भी सक्रिय हो सकते हैं। इसलिए उससे पूछताछ के आधार पर संभावित सहयोगियों की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है।
फिलहाल आरोपी के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। आरपीएफ और पुलिस की संयुक्त जांच जारी है तथा मामले से जुड़े अन्य संदिग्धों की तलाश की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि रेलवे की संवेदनशील सामग्री की चोरी अथवा अवैध निकासी के पीछे वास्तविक रूप से कौन-कौन लोग शामिल थे।

















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