दुर्गापुर : कभी बंगाल की औद्योगिक पहचान रहे दुर्गापुर के लिए शनिवार को विकास की नई उम्मीद सामने आई। केंद्रीय बजट 2026-27 में घोषित एकीकृत पूर्वी तट औद्योगिक गलियारे में दुर्गापुर को महत्वपूर्ण और सुगम संपर्क वाले औद्योगिक केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना है। केंद्र सरकार के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य पूर्वी भारत में आधुनिक औद्योगिक आधार, बेहतर संपर्क और निवेश के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करना है।
इस घोषणा से दुर्गापुर सहित पश्चिम बर्दवान के औद्योगिक क्षेत्र में नई संभावनाओं को लेकर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि परियोजना की घोषणा के बाद तत्काल बड़े पैमाने पर उद्योग स्थापित नहीं होंगे। इसके लिए विस्तृत योजना, भूमि, आधारभूत संरचना और निवेश से जुड़ी प्रक्रियाओं को चरणबद्ध तरीके से पूरा करना होगा।
परिवहन और उद्योग को मिलेगी एकीकृत गति
औद्योगिक गलियारे की अवधारणा केवल सड़क निर्माण तक सीमित नहीं है। इसके तहत सड़क, रेल, माल परिवहन और अन्य आधारभूत सुविधाओं को आपस में जोड़कर औद्योगिक गतिविधियों को गति देने की योजना है। केंद्र सरकार औद्योगिक गलियारों को ऐसे नियोजित आर्थिक क्षेत्रों के रूप में विकसित कर रही है, जहां उद्योगों को आधुनिक और तैयार आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।
दुर्गापुर की स्थिति इस दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। शहर पहले से ही इस्पात, ऊर्जा, इंजीनियरिंग और विनिर्माण गतिविधियों का प्रमुख केंद्र है। यहां उपलब्ध औद्योगिक अनुभव और कुशल मानव संसाधन प्रस्तावित विकास के लिए आधार तैयार कर सकते हैं।
तीन हजार करोड़ का बजटीय प्रावधान
वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास एवं कार्यान्वयन न्यास यानी एनआईसीडीआईटी के लिए 3,000 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। आधिकारिक दस्तावेज के अनुसार, यह राशि औद्योगिक गलियारों के विभिन्न केंद्रों पर आधारभूत ढांचे को विकसित करने तथा नए औद्योगिक क्षेत्रों की योजना और प्रारंभिक अभियांत्रिकी कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए है।
देश में 11 औद्योगिक गलियारों के अंतर्गत विभिन्न परियोजनाएं कार्यान्वित की जा रही हैं। केंद्र सरकार ने बताया है कि कुछ परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं, जबकि कई अन्य अंतिम चरण में हैं।
दुर्गापुर की औद्योगिक क्षमता बनेगी आधार
दुर्गापुर में पहले से स्थापित इस्पात और विनिर्माण उद्योगों के कारण यहां औद्योगिक गतिविधियों का मजबूत आधार मौजूद है। प्रस्तावित गलियारे के माध्यम से नए उद्योगों, सहायक इकाइयों, माल परिवहन, भंडारण और आपूर्ति शृंखला से जुड़े क्षेत्रों को बढ़ावा मिलने की संभावना है।
औद्योगिक गतिविधियां बढ़ने पर प्रत्यक्ष रोजगार के साथ परिवहन, रखरखाव, लॉजिस्टिक्स, इंजीनियरिंग सेवाओं और छोटे एवं मध्यम उद्यमों में भी अवसर पैदा हो सकते हैं। हालांकि रोजगार की वास्तविक संख्या निवेश और परियोजना के क्रियान्वयन की गति पर निर्भर करेगी।
घोषणा से क्रियान्वयन तक बड़ी चुनौती
विशेषज्ञों के अनुसार, किसी औद्योगिक गलियारे की सफलता केवल बजटीय घोषणा से तय नहीं होती। भूमि उपलब्धता, पर्यावरणीय स्वीकृति, आधारभूत ढांचे का निर्माण, निवेशकों की भागीदारी और केंद्र-राज्य समन्वय इसकी गति निर्धारित करते हैं।
केंद्र सरकार के अनुसार औद्योगिक केंद्रों के विकास में राज्य सरकारों के साथ साझेदारी, विस्तृत मास्टर प्लान और आवश्यक स्वीकृतियां महत्वपूर्ण चरण हैं।
ऐसे में दुर्गापुर के लिए यह घोषणा निश्चित रूप से नई औद्योगिक संभावनाओं का संकेत है, लेकिन इसका वास्तविक लाभ जमीन पर परियोजनाएं उतरने के बाद ही दिखाई देगा। यदि नियोजित ढांचे के साथ निवेश और उद्योगों का विस्तार हुआ तो दुर्गापुर एक बार फिर पूर्वी भारत के प्रमुख औद्योगिक मानचित्र पर और मजबूत स्थान बना सकता है।

















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