दुर्गापूजा विवाद पर अग्निमित्रा पाल बोलीं, विहिप के बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया जा रहा है, पूजा स्थल की गरिमा जरूरी

Facebook
Twitter
WhatsApp

आसनसोल :  दुर्गापूजा के दौरान पूजा पंडालों में खान-पान और पहनावे को लेकर विश्व हिंदू परिषद की ओर से की गई अपील के बाद शुरू हुए राजनीतिक विवाद के बीच रविवार को मंत्री अग्निमित्रा पाल ने अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि विहिप के बयान को गलत अर्थ में प्रस्तुत किया जा रहा है और वास्तविक बात को समझने की आवश्यकता है।

IMG 20240918 WA0025

मीडिया से बातचीत के दौरान अग्निमित्रा पाल ने स्पष्ट किया कि दुर्गापूजा आस्था और परंपरा से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व है। पूजा मंडप के भीतर पवित्र वातावरण और देवी की गरिमा बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस विषय को अनावश्यक विवाद का रूप देने के बजाय धार्मिक भावनाओं और पूजा की मर्यादा को समझना चाहिए।

मंत्री ने कहा कि सरकार की ओर से इस संबंध में अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री द्वारा ही लिया जाएगा। फिलहाल उनके पास सरकार के किसी अंतिम निर्णय की आधिकारिक जानकारी नहीं है। इसलिए किसी भी तरह की अटकल या अपुष्ट जानकारी के आधार पर विवाद खड़ा करना उचित नहीं होगा।

उन्होंने कहा कि पूजा मंडप के भीतर जूते-चप्पल नहीं ले जाना जैसी सामान्य बात पर किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए। उनका कहना था कि पूजा स्थल की पवित्रता और अनुशासन बनाए रखने के लिए कुछ सामान्य मर्यादाओं का पालन किया जाता है। इसे किसी व्यक्ति की खान-पान की स्वतंत्रता से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।

अग्निमित्रा पाल ने कहा कि बंगाल की सामाजिक और खान-पान की संस्कृति विविध रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बंगाली समाज में मछली, मांस और चिकन जैसे भोजन का सेवन सामान्य बात है और इस पर किसी प्रकार की रोक की बात नहीं कही गई है। उनका जोर केवल उस स्थान की गरिमा बनाए रखने पर है, जहां देवी की पूजा की जाती है।

IMG 20250511 WA0050

उन्होंने लोगों से विश्व हिंदू परिषद के बयान को विकृत रूप में प्रस्तुत नहीं करने की अपील की। उनके अनुसार, संगठन की बात का मूल उद्देश्य पूजा स्थल की मर्यादा और वातावरण को लेकर है। इसे व्यापक सामाजिक या खान-पान संबंधी प्रतिबंध के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं है।

गौरतलब है कि दुर्गापूजा से पहले विश्व हिंदू परिषद की ओर से पूजा पंडालों की सजावट, खान-पान और पहनावे को लेकर कुछ सुझाव एवं अपील सामने आई थी। इसके बाद विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक वर्गों के बीच इस विषय को लेकर चर्चा तेज हो गई।

रविवार को मंत्री के बयान के बाद विवाद को लेकर एक बार फिर राजनीतिक चर्चा शुरू हो गई है। अब निगाहें राज्य सरकार के आधिकारिक रुख पर टिकी हैं। फिलहाल अग्निमित्रा पाल ने स्पष्ट किया कि पूजा की धार्मिक गरिमा बनाए रखना आवश्यक है, जबकि बंगाल की पारंपरिक खान-पान संस्कृति पर किसी प्रकार की रोक की बात नहीं कही गई है।

Leave a Comment

Leave a Comment

[democracy id="1"]

Share Market

Also Read This

Gold & Silver Price

Our Visitor

0 4 3 2 9 5
Users Today : 8
Users Yesterday : 29