रानीगंज : लगातार हुई मूसलाधार बारिश के बाद रानीगंज क्षेत्र में नूनिया नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया। नदी में तेज बहाव के कारण हाड़ाभांगा और कयारडी पुल पूरी तरह जलमग्न हो गए। स्थिति यह रही कि दोनों पुलों के ऊपर से पानी तेज गति से बहता रहा, जिससे इन मार्गों से आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया। नदी के बढ़े जलस्तर ने आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
पुलों के डूब जाने से रानीगंज के मुख्य शहर से करीब 15 से 20 गांवों का सीधा संपर्क प्रभावित हुआ है। ग्रामीणों के लिए शहर तक पहुंचना मुश्किल हो गया है। रोजमर्रा की जरूरतों के लिए रानीगंज पर निर्भर रहने वाले लोगों को अब वैकल्पिक रास्तों का सहारा लेना पड़ रहा है। लगातार बारिश और नदी के तेज बहाव के कारण ग्रामीण इलाकों में सामान्य जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है।
बच्चों की पढ़ाई से लेकर मरीजों की आवाजाही तक प्रभावित
पुलों पर पानी चढ़ने के कारण विद्यार्थियों की परेशानी सबसे अधिक बढ़ गई है। कई गांवों से विद्यालय जाने वाले बच्चों की आवाजाही रुक गई है। अभिभावकों में भी बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है। वहीं, किसी मरीज को तत्काल अस्पताल पहुंचाने की स्थिति में ग्रामीणों के सामने गंभीर समस्या खड़ी हो सकती है।
दूध, सब्जी, खाद्य सामग्री और अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति भी प्रभावित होने लगी है। ग्रामीणों का कहना है कि संपर्क मार्ग बंद होने से दैनिक जरूरत का सामान गांव तक पहुंचाना कठिन हो गया है। इसके अलावा पेयजल आपूर्ति से जुड़ी पाइपलाइन भी नदी के बढ़े पानी में डूब गई है, जिससे कई स्थानों पर पेयजल संकट की आशंका बढ़ गई है।

हर वर्ष बरसात में सामने आती है समस्या
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार नूनिया नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ पुलों के डूबने की समस्या नई नहीं है। प्रत्येक वर्ष मानसून के दौरान ऐसी स्थिति बनती है और आसपास के गांवों का संपर्क रानीगंज से टूट जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि बार-बार उत्पन्न होने वाली इस समस्या का अस्थायी उपाय करने के बजाय स्थायी समाधान तलाशना जरूरी है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि नदी के जलस्तर और क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों का तकनीकी अध्ययन कराया जाए। इसके बाद ऐसे स्थान पर ऊंचे और मजबूत पुल का निर्माण कराया जाए, जिससे भविष्य में बाढ़ अथवा अत्यधिक वर्षा के दौरान आवागमन बाधित न हो। ग्रामीणों का कहना है कि स्थायी पुल बनने से विद्यार्थियों, मरीजों, किसानों और रोजाना आवागमन करने वाले लोगों को बड़ी राहत मिलेगी।
प्रशासन ने जारी की सतर्कता की अपील
वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए लोगों से नदी के आसपास जाने और जलमग्न पुलों को पार करने का प्रयास नहीं करने की अपील की गई है। तेज बहाव के बीच पुल पार करना जानलेवा साबित हो सकता है। स्थानीय लोगों से विशेष रूप से बच्चों को नदी और जलमग्न मार्गों से दूर रखने को कहा गया है।
फिलहाल ग्रामीणों की नजर नदी के जलस्तर पर बनी हुई है। बारिश कम होने और पानी उतरने के बाद ही स्थिति सामान्य होने की उम्मीद है। हालांकि, हर वर्ष सामने आने वाली इस समस्या ने एक बार फिर क्षेत्र में स्थायी जलनिकासी और सुरक्षित संपर्क मार्ग की आवश्यकता को उजागर कर दिया है।

















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