कोलकाता : पश्चिम बंगाल के स्कूली विद्यार्थियों के लिए शिक्षा व्यवस्था में डिजिटल बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की तैयारी है। राज्य सरकार केंद्र के सहयोग से विद्यार्थियों की शैक्षणिक पहचान को डिजिटल स्वरूप देने की दिशा में आगे बढ़ रही है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत विद्यार्थियों के लिए APAAR ID तैयार की जाएगी, जिसके माध्यम से उनके शैक्षणिक जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण अभिलेख एक ही डिजिटल पहचान से जोड़े जा सकेंगे।
गुरुवार को शिक्षा क्षेत्र से जुड़ी इस पहल को लेकर विद्यार्थियों और अभिभावकों के बीच भी चर्चा तेज रही। व्यवस्था लागू होने के बाद प्रत्येक विद्यार्थी को 12 अंकों वाली विशिष्ट पहचान संख्या मिलने की बात कही जा रही है। APAAR का पूरा नाम Automated Permanent Academic Account Registry है। इसे विद्यार्थियों की स्थायी शैक्षणिक पहचान के रूप में विकसित किया जा रहा है।
एक पहचान, अनेक शैक्षणिक अभिलेख
APAAR ID का उद्देश्य विद्यार्थी के शैक्षणिक रिकॉर्ड को सुरक्षित डिजिटल स्वरूप में एक स्थान पर उपलब्ध कराना है। इसके अंतर्गत अंकपत्र, प्रमाणपत्र, डिग्री, डिप्लोमा तथा शैक्षणिक उपलब्धियों से संबंधित अभिलेख डिजिटल रूप से जोड़े जा सकते हैं। इससे विद्यार्थियों को भविष्य में अपने शैक्षणिक दस्तावेजों को बार-बार भौतिक रूप में संभालने और अलग-अलग स्थानों पर प्रस्तुत करने की आवश्यकता कम हो सकती है।
यह व्यवस्था डिजिलॉकर और अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स (ABC) जैसी डिजिटल प्रणालियों से जुड़ने के उद्देश्य से तैयार की गई है। इससे उच्च शिक्षा में प्रवेश, संस्थान बदलने अथवा शैक्षणिक उपलब्धियों के सत्यापन जैसी प्रक्रियाओं में सुविधा मिलने की उम्मीद है।
पढ़ाई से रोजगार तक उपयोगी होने की उम्मीद
APAAR ID को केवल विद्यालय स्तर तक सीमित नहीं रखने की योजना है। विद्यार्थी के आगे की पढ़ाई से संबंधित रिकॉर्ड भी इसी डिजिटल पहचान से जुड़े रह सकते हैं। उच्च शिक्षा में प्रवेश के दौरान दस्तावेजों के सत्यापन से लेकर भविष्य में रोजगार संबंधी आवश्यकताओं तक इसका उपयोग किया जा सकेगा।
डिजिटल अभिलेख उपलब्ध होने से विद्यार्थियों को प्रमाणपत्रों की प्रतियां लेकर विभिन्न संस्थानों के चक्कर लगाने की परेशानी कम होने की उम्मीद है। साथ ही शैक्षणिक रिकॉर्ड के व्यवस्थित डिजिटल संरक्षण से दस्तावेजों के रखरखाव और सत्यापन की प्रक्रिया भी सरल हो सकती है।
नाबालिग विद्यार्थियों के लिए अभिभावक की सहमति
इस पूरी व्यवस्था में विद्यार्थियों के व्यक्तिगत और शैक्षणिक आंकड़ों की सुरक्षा को महत्वपूर्ण माना गया है। नाबालिग विद्यार्थियों के लिए APAAR ID तैयार करने से पहले अभिभावकों की सहमति आवश्यक होगी। यानी माता-पिता की अनुमति के बिना नाबालिग विद्यार्थी की डिजिटल पहचान तैयार नहीं की जाएगी।
इस व्यवस्था को विद्यार्थियों की शैक्षणिक यात्रा को एकीकृत डिजिटल पहचान देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हालांकि, इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए विद्यालयों, शिक्षकों, विद्यार्थियों और अभिभावकों के बीच पर्याप्त जागरूकता आवश्यक होगी।
राज्य में डिजिटल शिक्षा व्यवस्था के विस्तार के साथ APAAR ID आने वाले समय में विद्यार्थियों के शैक्षणिक दस्तावेजों के प्रबंधन को अधिक व्यवस्थित और सुविधाजनक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

















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