कुल्टी : रविवार को नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल के बीच कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान की गिरफ्तारी के विरोध में कुल्टी के बराकर में पार्टी कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने बराकर पुलिस चौकी के सामने पहुंचकर गिरफ्तारी के खिलाफ विरोध जताया और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।

मिलन प्रधान की गिरफ्तारी 2007 से जुड़े पुराने मामलों में जारी गैर-जमानती वारंट के आधार पर की गई है। पुलिस के अनुसार, उनके खिलाफ चार गैर-जमानती वारंट लंबित थे। शनिवार को अदालत में पेश किए जाने के बाद उन्हें 3 अक्टूबर तक 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
कांग्रेस ने उठाए गिरफ्तारी के समय पर सवाल
बराकर में प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि उपचुनाव से ठीक पहले प्रत्याशी की गिरफ्तारी से चुनावी प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। पार्टी नेताओं ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध से जोड़ते हुए कार्रवाई के समय पर सवाल उठाए। कांग्रेस का कहना है कि पुराने मामलों में वारंट लंबित होने के बावजूद गिरफ्तारी चुनाव के दौरान हुई है, इसलिए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
वहीं, पुलिस ने गिरफ्तारी को चुनावी राजनीति से जोड़ने से इनकार किया है। पुलिस के मुताबिक, मिलन प्रधान के खिलाफ वर्ष 2007 के नंदीग्राम और खेजुरी थाना क्षेत्रों में दर्ज मामलों से संबंधित चार गैर-जमानती वारंट लंबे समय से लंबित थे। पुलिस का कहना है कि चुनाव से पहले लंबित वारंटों की तामील के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत यह कार्रवाई की गई।

अदालत ने भेजा न्यायिक हिरासत में
पुलिस के अनुसार, मिलन प्रधान को पुराने मामलों में लंबे समय से लंबित वारंट के आधार पर गिरफ्तार किया गया। शनिवार को उन्हें हल्दिया की अदालत में पेश किया गया, जहां से न्यायिक हिरासत का आदेश दिया गया। अब उन्हें 3 अक्टूबर तक हिरासत में रहना होगा।
इस गिरफ्तारी के बाद नंदीग्राम उपचुनाव को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि वह चुनावी गतिविधियों से पीछे नहीं हटेगी और प्रत्याशी की अनुपस्थिति में भी प्रचार जारी रखने की बात कही है।
बराकर में हुए प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने पुलिस से मामले की पूरी जानकारी सार्वजनिक करने और कानूनी प्रक्रिया के तहत निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की। पुलिस की ओर से कहा गया है कि गिरफ्तारी लंबित न्यायिक वारंटों की तामील की प्रक्रिया का हिस्सा है।
इस घटनाक्रम ने नंदीग्राम उपचुनाव के बीच कानून और राजनीति से जुड़े मुद्दों को चर्चा में ला दिया है। मामले में अदालत की आगे की कार्यवाही और संबंधित पक्षों के अगले कदम पर अब निगाहें टिकी हैं।















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