रानीगंज : बुधवार को रानीगंज के व्यवसायी एवं चार्टर्ड अकाउंटेंट उमेश डोकानिया से जुड़ी करीब 2.50 करोड़ रुपये की साइबर धोखाधड़ी के मामले में पुलिस को महत्वपूर्ण सफलता मिली। दुर्गापुर साइबर सेल की त्वरित कार्रवाई और संबंधित बैंकों के साथ समन्वय के बाद ठगी की रकम में से 1,49,30,644 रुपये सुरक्षित बरामद कर पीड़ित के बैंक खाते में वापस जमा कराए गए। पुलिस के अनुसार, शेष राशि की बरामदगी और मामले में शामिल आरोपितों तक पहुंचने के लिए जांच जारी है।
मालिक बनकर कर्मचारी को भेजे निर्देश
पुलिस में दर्ज शिकायत के अनुसार, साइबर ठग ने कथित रूप से उमेश डोकानिया का प्रतिरूप धारण किया और उनके कर्मचारी से संपर्क कर स्वयं को प्रतिष्ठान का मालिक बताया। इसके बाद कर्मचारी को अलग-अलग बैंक खातों में रकम भेजने के निर्देश दिए गए।
बताया गया कि कर्मचारी ने कथित जालसाज के निर्देशों पर बिना स्वतंत्र पुष्टि किए विभिन्न बैंक खातों में कुल 2.50 करोड़ रुपये स्थानांतरित कर दिए। लेनदेन पूरा होने के बाद जब धोखाधड़ी का पता चला तो मामले की सूचना तत्काल साइबर पुलिस को दी गई।

15 सितंबर को दर्ज हुई शिकायत
व्यवसायी उमेश डोकानिया ने 15 सितंबर 2026 को दुर्गापुर साइबर सेल में पहुंचकर मामले की लिखित शिकायत दी। इतनी बड़ी राशि से जुड़ा मामला सामने आने के बाद साइबर सेल ने तत्काल कार्रवाई शुरू की।
पुलिस ने शिकायत को राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर दर्ज कराया। इसके बाद मामले को विधिवत आगे बढ़ाते हुए 16 सितंबर 2026 को रानीगंज थाने में मामला संख्या 390/26 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई।
बैंकों से समन्वय कर रकम पर लगाई रोक
मामले में सबसे महत्वपूर्ण कार्रवाई संबंधित बैंक खातों और लेनदेन से जुड़ी रही। साइबर सेल ने तत्काल संबंधित बैंकों से संपर्क स्थापित कर संदिग्ध लेनदेन को रोकने और उपलब्ध धनराशि को सुरक्षित करने की प्रक्रिया शुरू की।
पुलिस और बैंक अधिकारियों के बीच समन्वय के बाद ठगी की राशि के एक बड़े हिस्से को सुरक्षित किया जा सका। आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के पश्चात 1,49,30,644 रुपये पीड़ित के बैंक खाते में वापस जमा करा दिए गए।

शेष राशि और आरोपितों की तलाश
पुलिस के अनुसार, मामले में अभी जांच जारी है। साइबर धोखाधड़ी में इस्तेमाल किए गए बैंक खातों, धन के लेनदेन और कथित आरोपितों तक पहुंचने के लिए संबंधित जानकारियों की पड़ताल की जा रही है।
जांच में यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि रकम किन-किन खातों में स्थानांतरित हुई और उसके बाद धन का उपयोग अथवा स्थानांतरण किस प्रकार किया गया। शेष रकम की बरामदगी के लिए भी बैंकिंग लेनदेन की निगरानी की जा रही है।
व्यवसायियों के लिए बढ़ी साइबर सतर्कता की जरूरत
यह मामला कारोबार में डिजिटल लेनदेन के दौरान अतिरिक्त सावधानी बरतने की आवश्यकता भी सामने लाता है। विशेष रूप से किसी वरिष्ठ अधिकारी, मालिक या प्रबंधक के नाम से अचानक धन हस्तांतरण का निर्देश मिलने पर कर्मचारी द्वारा स्वतंत्र रूप से उसकी पुष्टि करना जरूरी है।
पुलिस की कार्रवाई से ठगी की रकम का एक बड़ा हिस्सा पीड़ित तक वापस पहुंचा है। हालांकि, पूरी राशि की बरामदगी और आरोपितों की गिरफ्तारी जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
फिलहाल दुर्गापुर साइबर सेल और रानीगंज पुलिस मामले की जांच में जुटी हैं। पुलिस के सामने अब शेष धनराशि की बरामदगी के साथ साइबर ठगी के पूरे नेटवर्क का पता लगाने की चुनौती है। मामले में आगे होने वाली कार्रवाई पर व्यवसायी वर्ग और स्थानीय लोगों की नजर बनी हुई है।














Users Today : 44
Users Yesterday : 46