आसनसोल : आगामी उत्सव को स्थानीय कारीगरों के परिश्रम और स्वदेशी उत्पादों से जोड़ने की पहल के तहत रविवार को आसनसोल उत्तर विधानसभा क्षेत्र के 27 नंबर वार्ड स्थित रामकृष्णडांगा में ‘वोकल फॉर लोकल’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में पांडेश्वर के विधायक जितेंद्र तिवारी उपस्थित रहे। इस दौरान स्थानीय मृत्तिका शिल्पियों द्वारा तैयार किए जा रहे मिट्टी के दीपों की खरीद के लिए उन्हें अग्रिम राशि प्रदान की गई।

कार्यक्रम का उद्देश्य स्थानीय कुम्हारों और मृत्तिका शिल्प से जुड़े परिवारों को उत्सव से पहले ही काम और आय का अवसर उपलब्ध कराना बताया गया। विधायक जितेंद्र तिवारी ने स्थानीय कारीगरों से बातचीत कर उनके कार्य की जानकारी ली तथा मिट्टी के दीपों के निर्माण से जुड़ी उनकी आवश्यकताओं को समझा।
आयोजकों के अनुसार, स्थानीय स्तर पर तैयार होने वाले उत्पादों को प्राथमिकता देने से छोटे कारीगरों और पारंपरिक शिल्पकारों को सीधे लाभ मिलता है। मिट्टी के दीप भारतीय परंपरा और संस्कृति से जुड़े होने के साथ-साथ ग्रामीण एवं स्थानीय अर्थव्यवस्था में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। आधुनिक बाजार में मशीन निर्मित वस्तुओं की बढ़ती उपलब्धता के बीच पारंपरिक कारीगरों के उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराना उनके व्यवसाय को बनाए रखने में सहायक हो सकता है।

जितेंद्र तिवारी ने कहा कि स्थानीय कलाकारों और कारीगरों के श्रम को सम्मान देना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उत्सव के अवसर पर स्थानीय स्तर पर निर्मित वस्तुओं की खरीद को बढ़ावा देने से कारीगरों के हाथों में सीधे आर्थिक संसाधन पहुंचेंगे। इससे पारंपरिक व्यवसाय से जुड़े परिवारों को अपने काम को आगे बढ़ाने में सहायता मिलेगी।
कार्यक्रम के दौरान स्थानीय लोगों से भी अपील की गई कि वे आगामी उत्सव में सजावट और पूजन सामग्री की खरीदारी करते समय स्थानीय कारीगरों द्वारा तैयार उत्पादों को प्राथमिकता दें। इससे स्थानीय बाजार में आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी और छोटे व्यवसायों को मजबूती मिलेगी।

‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान के माध्यम से स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के साथ आत्मनिर्भरता की भावना को मजबूत करने का संदेश दिया गया। आयोजकों ने कहा कि स्थानीय कारीगरों को केवल उत्सव के समय ही नहीं, बल्कि पूरे वर्ष बाजार और सहयोग उपलब्ध कराने की दिशा में प्रयास आवश्यक हैं।
कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने मिट्टी के दीप बनाने वाले कारीगरों के प्रयासों की सराहना की। आगामी उत्सव में स्थानीय मिट्टी के दीपों से घर और पूजा स्थलों को सजाने की अपील के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। आयोजकों ने उम्मीद जताई कि इस पहल से स्थानीय मृत्तिका शिल्पियों को आर्थिक संबल मिलेगा और पारंपरिक कला को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में सहायता मिलेगी।














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