
आसनसोल : भारतीय उद्योग जगत के प्रमुख स्तंभ और विख्यात परोपकारी रतन टाटा का मुंबई के एक अस्पताल में 86 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वे उम्र संबंधी बीमारियों से जूझ रहे थे और आईसीयू में भर्ती थे। महाराष्ट्र सरकार ने उनके सम्मान में एक दिन का राजकीय शोक घोषित किया है, और उन्हें राजकीय सम्मान के साथ विदाई दी गई। उनके निधन से संपूर्ण देश में शोक की लहर दौड़ गई है। सामाजिक, आर्थिक और व्यापारिक जगत के सभी वर्गों ने अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

रानीगंज के व्यापारिक समुदाय में भी गहरा शोक व्याप्त है। गुरुवार को विभिन्न स्थानों पर उद्योगपतियों और व्यवसायियों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। दुर्गापूजा समितियों और व्यापारियों ने विशेष रूप से रतन टाटा को याद किया। सुभाष हार्डवेयर स्टोर के निदेशक महेश कुमार खेड़िया ने शोक व्यक्त करते हुए कहा कि उनका व्यवसाय टाटा के ट्यूब्स डिवीजन से जुड़ा हुआ है। उन्होंने बताया कि वर्ष 1994 में उनके पिता ने इस क्षेत्र में कार्य आरंभ किया था। महेश खेड़िया ने कहा कि रतन टाटा ने व्यापार में नई सोच और नैतिक मूल्यों का समावेश कर व्यवसायिकता का एक नया मानदंड स्थापित किया।
रमेश कुमार खेड़िया ने अपने श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए बताया कि वे वर्ष 1984 से ही टाटा से जुड़े हैं। मात्र 17 वर्ष की उम्र से उनका टाटा सेंटर में आना-जाना था। उन्होंने कहा कि रतन टाटा के नेतृत्व में टाटा ग्रुप ने वैश्विक स्तर पर भारत को विशिष्ट पहचान दिलाई। उनके सामाजिक कार्य और शिक्षा-स्वास्थ्य क्षेत्र में योगदान ने टाटा को एक प्रतिष्ठित ब्रांड बनाया।
















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