
अंडाल : पश्चिम बर्धमान के अंडाल प्रखंड के उखड़ा सुखो पारा स्थित ऐतिहासिक मोहोमाया बेदी पूजा का प्रारंभ भव्य उत्साह के साथ हुआ। लगभग 150 वर्ष पुरानी इस पूजा में विशेष बात यह है कि यहां देवी-देवताओं की मूर्ति के स्थान पर मात्र एक पवित्र बेदी की ही आराधना की जाती है। यह बेदी इस क्षेत्र के श्रद्धालुओं की गहन आस्था और आध्यात्मिकता का केंद्र है, जहां प्रतिवर्ष श्रद्धालु मनोकामनाओं की पूर्ति हेतु एकत्रित होते हैं।

इस वर्ष, इस परंपरा का आयोजन मेहरा परिवार की देखरेख में किया जा रहा है। ग्राम पंचायत के उपप्रधान सरन सेगल ने बताया कि इस पूजा का शुभारंभ संकर चांद मेहरा के परदादा हरी नारायण मेहरा ने किया था, और तब से लेकर आज तक यह पूजा अनवरत जारी है। मेहरा परिवार इस पूजा की सेवा का कार्य बखूबी निभाता आ रहा है, और हर पीढ़ी में इसकी परंपरा को संजोए रखा गया है। इस अवसर पर गांव के नागरिकों ने मेहरा परिवार की इस निष्ठा और सेवा की प्रशंसा की।
सरन सेगल ने बताया कि यह पूजा केवल धार्मिक आस्था का नहीं, बल्कि स्थानीय संस्कृति और सामुदायिक एकता का प्रतीक है। बिना किसी मूर्ति की पूजा करने की यह अद्वितीय परंपरा इस क्षेत्र के लोगों के बीच विशेष स्थान रखती है और उन्हें आध्यात्मिक संतोष प्रदान करती है। मोहोमाया बेदी की पूजा केवल एक अनुष्ठान नहीं, बल्कि पूर्वजों की आस्था, त्याग और संस्कृति की धरोहर है, जो आज भी पूरे हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ मनाई जाती है।
















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