
जामुड़िया : ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल) के केंदा एरिया अंतर्गत न्यू केंदा कोलियरी में हुए भयावह भू-धसान ने समूचे क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया है। शुक्रवार प्रातः 50 फीट चौड़े एवं 120 फीट गहरे गोफ का निर्माण हो जाने से स्थानीय निवासियों में तीव्र आतंक व्याप्त हो गया। इस अनपेक्षित घटना के पश्चात्, ईसीएल प्रबंधन ने जल्दबाजी में क्षेत्र में डोजरिंग के माध्यम से मिट्टी भराई का कार्य प्रारंभ कर दिया, किन्तु स्थानीय निवासियों ने इसे महज खानापूर्ति का प्रयास करार दिया।

स्थानीय पूर्व पंचायत सदस्य उमेश राम ने जानकारी दी कि गुरुवार रात्रि लगभग 9:30 बजे एक प्रचंड आवाज के साथ यह भू-धसान घटित हुआ। उनके अनुसार, यह घटना इतनी जोरदार थी कि समूचा इलाका मानो थर्रा उठा हो। उमेश राम ने बताया कि यह क्षेत्र पहले भी भू-धसान की चपेट में आ चुका है। लगभग 10 वर्ष पूर्व इसी स्थान पर भू-धसान हुआ था, जिसके पश्चात् ईसीएल प्रबंधन ने केवल कुछ व्यक्तियों को पुनर्वासित किया, जबकि शेष स्थानीय निवासियों के पुनर्वास का कोई ठोस प्रबंध नहीं किया गया। उन्होंने प्रबंधन पर पुनर्वास के आश्वासन मात्र देने का आरोप लगाते हुए कहा कि वास्तविकता में कुछ भी ठोस कार्रवाई नहीं की गई है, और यह समस्या अभी भी बरकरार है।

पिछले दो दिनों से हो रही मूसलाधार बारिश ने भी इस भू-धसान को बढ़ावा दिया। पास स्थित तेलों तालाब का जलस्तर भर जाने के कारण पानी का रिसाव भू-धसान क्षेत्र में हो रहा है, जिससे इसके क्षेत्रफल में विस्तार हो रहा है। उमेश राम ने चेतावनी दी कि यदि तत्काल ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह भू-धसान और भी गंभीर रूप धारण कर सकता है। उन्होंने बताया कि ईसीएल द्वारा पास स्थित न्यू केंदा ओसीपी में निरंतर जोरदार ब्लास्टिंग की जाती है, जिससे आस-पास के क्षेत्रों में कभी भी गंभीर अनहोनी घटित हो सकती है।
जामुड़िया पंचायत समिति सदस्य उदीप सिंह ने इस घटना को अत्यंत चिंताजनक बताते हुए कहा कि यह भू-धसान जान-माल के लिए अत्यधिक खतरनाक सिद्ध हो सकता है। उन्होंने कहा कि ईसीएल प्रबंधन को तत्काल प्रभाव से यहां रह रहे समस्त निवासियों का पुनर्वास कर उन्हें सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित करना चाहिए। उन्होंने यह भी स्मरण दिलाया कि इसी क्षेत्र में पहले भी भू-धसान के दौरान ईसीएल के वरिष्ठ ओवरमैन अजय मुखर्जी जमींदोज हो चुके हैं, किन्तु इसके बावजूद ईसीएल प्रबंधन की निष्क्रियता आश्चर्यजनक है।

स्थानीय निवासी मंजू घोष, सोनी देवी और मंजू कुमारी राम ने बताया कि गुरुवार रात्रि को उनके घर के समीप हुई इस घटना ने उन्हें भयभीत कर दिया है। उन्होंने कहा कि पास के तालाब का पानी धीरे-धीरे भू-धसान स्थल तक रिस रहा है, जिससे भविष्य में और भी भीषण भू-धसान की संभावना बढ़ रही है। उन्होंने मांग की कि ईसीएल प्रबंधन को अविलंब समस्त निवासियों के पुनर्वास की ठोस व्यवस्था करनी चाहिए।
अंत में, स्थानीय निवासियों का आक्रोश इस बात को लेकर था कि इतनी गंभीर घटना के बाद भी ईसीएल का कोई उच्चाधिकारी स्थल पर निरीक्षण हेतु नहीं आया। ईसीएल द्वारा मात्र मिट्टी भराई कर अपने कर्तव्यों की इतिश्री करना निंदनीय है।















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