
आसनसोल: आसनसोल स्थित मेमू शेड यार्ड में डीज़ल लोको स्टेबलिंग लाइन के हाल ही में संपन्न विद्युतीकरण ने रेलवे सेवाओं की परिचालन दक्षता को एक महत्वपूर्ण उन्नति प्रदान की है। लगभग 350 मीटर तक इस स्टेबलिंग लाइन का विद्युतीकरण पूर्ण हो चुका है। इसके अतिरिक्त, एक अन्य 700 मीटर का विद्युतीकरण किया गया है, जिससे लोको शेड और मेमू शेड यार्ड के बीच निर्बाध रूप से जुड़ाव सुनिश्चित हो गया है, जो न केवल यार्ड के भीड़ को कम करने में सहायक है, बल्कि लोकोमोटिव और रेक्स की आवाजाही में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

इस परियोजना में ‘ईस्ट बाहर लाइन’ का भी संशोधन किया गया है, जो पहले केवल मेमू संचालन के लिए समर्पित थी। अब इसे लोकोमोटिव और मेमू दोनों के लिए अनुकूलित कर दिया गया है। ये बदलाव न केवल आसनसोल यार्ड की परिचालनिक लचीलेपन को सुधारते हैं, बल्कि भीड़भाड़ कम करके सुरक्षा मानकों को भी बढ़ाते हैं। विद्युतीकरण के प्रमुख लाभ: 1. दोहरी पहुंच सुविधा: इस विद्युतीकरण के माध्यम से आसनसोल स्थित इलेक्ट्रिक लोको शेड में अब दोनों दिशाओं से विद्युत इंजन का प्रवेश और निकास संभव हो गया है। 2. शंटिंग समय में कमी: बिना तार वाली एक लाइन के विद्युतीकरण से शंटिंग समय में उल्लेखनीय कमी आई है, जिससे कार्य संचालन अधिक सुव्यवस्थित हो गया है। 3. शंटिंग लचीलापन में वृद्धि: शंटिंग संचालन में बढ़े हुए लचीलेपन से लोकोमोटिव की आवाजाही का समय भी काफी घट गया है। 4. सुरक्षा उपायों में सुधार: सुगम शंटिंग संचालन से लाइनों को खाली रखा जा रहा है, जिससे लोकोमोटिव संचालन के दौरान भीड़भाड़ कम हो रही है और सुरक्षा बढ़ रही है। 5. स्टेबलिंग क्षमता में विस्तार: नवविद्युतीकृत खंड अब 13 लोकोमोटिव तक की स्टेबलिंग क्षमता को समाहित कर सकता है, जिससे स्थान और दक्षता का अनुकूलन होता है।

ये सुधार पूर्व रेलवे की आधुनिक रेलवे संचालन को प्रोत्साहित करने और सार्वजनिक सेवा प्रदायगी को सशक्त बनाने की प्रतिबद्धता का प्रमाण हैं। यह विद्युतीकरण परियोजना न केवल वर्तमान चुनौतियों का समाधान करती है, बल्कि भविष्य में रेल परिवहन में और भी उन्नतियों के लिए मंच तैयार करती है।















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