किसानों की चिंता: बर्धमान में तेज़ बारिश और हवा से धान की फसल को भारी नुकसान

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ghanty

पूर्व बर्धमान: राज्य के अनाज गोदामों में डानर का कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ा है। लेकिन हाल की मूसलधार बारिश के साथ आई तेज़ हवा ने किसानों के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं, जिससे हज़ारों बीघा फसल बर्बाद हो गई है। खासकर गोबिंदभोग धान की फसल को गंभीर नुकसान हुआ है। इस स्थिति में अमन कृषि करने वाले किसान बुरी तरह परेशान हैं।

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जिला कृषि अधिकारी नकुलचंद्र माईती ने जानकारी दी कि इस वर्ष 3 लाख 77 हज़ार हेक्टेयर भूमि में अमन धान की खेती की गई है। इनमें से जिले के 40 हजार हेक्टेयर में गोबिंदभोग धान की खेती हुई है। विशेष रूप से खंडघोष और रायना के 1 एवं 2 नंबर ब्लॉक में इस धान की खेती की जाती है। बीते गुरुवार की सुबह से लगातार चल रही तेज़ हवा और बारिश ने बीघा दर बीघा फसल को बर्बाद कर दिया है। धान के पौधे गिरकर बिखर गए हैं। किसानों का कहना है कि इससे उत्पादन पर गंभीर असर पड़ेगा।

हालांकि, नकुलचंद्र माईती का कहना है कि अभी धान की फसल को होने वाले नुकसान की आशंका कम है। यदि मौसमी स्थितियों में और अधिक बिगड़ती हैं, तो अमन धान की खेती प्रभावित होगी। लेकिन जिला के किसानों का मत है कि इस बारिश और तेज़ हवाओं के चलते उनके गोबिंदभोग धान के पौधे सभी माटी पर गिर गए हैं। इससे उत्पादन में कमी आएगी।

किसान मुक्त राय ने कहा, “इस समय धान में बुँदे आ गई थीं। लेकिन अब खेतों में धान गिर गया है। इसलिए उत्पादन स्वाभाविक रूप से घटित होगा।” एक अन्य किसान शमसुद्दीन ने भी चिंता जताई कि केवल गोबिंदभोग धान ही नहीं, बल्कि स्वर्णलघु जाति के धान को भी भारी नुकसान होगा।

रायना और खंडघोष के साथ-साथ जिले के काटोआ, कालना, जमालपुर, भातर, आउशग्राम, गलसी, केतुगराम और मंगलकोट के सभी क्षेत्रों में अमन धान की खेती करने वाले किसान समस्या का सामना कर रहे हैं। आउशग्राम के निवासी अशोक घोष ने कहा, “बाढ़ ने कोई नुकसान नहीं पहुँचाया। लेकिन तेज़ हवा के साथ आई बारिश ने फसल को गिरा दिया है। इससे उत्पादन में कमी आएगी।”

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किसानों के बीच चिंता का माहौल है, क्योंकि यह स्थिति उनकी आर्थिक स्थिरता को भी प्रभावित कर सकती है। जब फसल उत्पादन में कमी आएगी, तो इससे किसानों की आजीविका पर गंभीर संकट आ सकता है। इसलिए, यह अत्यंत आवश्यक है कि प्रशासन और कृषि विभाग इस समस्या का समाधान ढूँढें और प्रभावित किसानों की सहायता करें, ताकि वे इस कठिन समय में अपनी खेती को बचा सकें।

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