

आसनसोल : शिल्पांचल की प्रतिष्ठित साहित्यिक और सांस्कृतिक संस्था ‘आस्था’ के तत्वावधान में छठ महापर्व की समाप्ति के उपलक्ष्य में एक विशेष पारंपरिक त्योहार मिलन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में शारदीय दुर्गोत्सव से छठ तक की त्योहारों की लंबी श्रृंखला में लोक संस्कृति, लोक-शास्त्र, और लोक-आस्था के तत्वों पर विद्वान वक्ताओं ने अपने विचार प्रकट किए।
इस आयोजन के दौरान, विद्वतजनों ने लोक संस्कृति में व्याप्त इन पर्वों के पौराणिक, ऐतिहासिक, सामाजिक, और आध्यात्मिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। मुख्य वक्ता डॉ. कृष्ण कुमार श्रीवास्तव (गर्ल्स कॉलेज, आसनसोल), डॉ. अरुण पांडे (बीबी कॉलेज, आसनसोल), डॉ. विजय नारायण (बीसी कॉलेज, आसनसोल), प्रसिद्ध कथाकार महावीर राजी उर्फ राजेश, और अशोक आशीष ने पर्वों के प्रकृति, विज्ञान, और लोक जीवन के सामंजस्य पर अपने दृष्टिकोण प्रस्तुत किए। वक्ताओं ने पर्वों के सामाजिक और सांस्कृतिक योगदान को प्रतिपादित करते हुए कहा कि ये त्यौहार भारतीय समाज में आत्मीयता, अनुशासन, और समरसता का संचार करते हैं।

भूतपूर्व कुलपति डॉ. दामोदर मिश्र ने इस प्रकार के आयोजनों की सांस्कृतिक और शैक्षिक महत्ता को रेखांकित करते हुए अपने प्रेरणादायक विचार प्रस्तुत किए। कार्यक्रम में लाॅरेटो कान्वेंट की सिल्विया डिक्रूज, श्रीमती कंचन सिंह, श्रीमती दीपा श्रीवास्तव, श्रीमती राखी शर्मा, श्रीमती शीला बरनवाल, शिक्षक संतोष कुमार बरनवाल, कवि दिनेश प्रसाद गुप्ता गर्ग, शिक्षक भोले शंकर सिंह (डीएवी कन्यापुर), वैद्यनाथ वर्णवाल, हरि नारायण सिंह, और सुरेश कुमार ओझा सहित अनेक प्रमुख विभूतियों ने अपने वक्तव्यों और गीतों से समां बांध दिया।

इस अवसर पर ‘आस्था’ के अध्यक्ष नरेश अग्रवाल द्वारा दयानंद विद्यालय के पूर्व प्रधानाध्यापक श्री बासुदेव नारायण सिंह को उनके शतायु जीवन के प्रति सम्मान व्यक्त करने का सुझाव सभी को प्रभावित करने वाला था। कार्यक्रम के अंत में संस्था के संरक्षक अशोक अग्रवाल ने उपस्थित जनसमूह का आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। संयोजक नवीन चंद्र सिंह ने कार्यक्रम का सफल संचालन किया और सभी आगंतुकों का अभिवादन किया। इस आयोजन में कोलकाता से कविता शर्मा ऑनलाइन माध्यम से जुड़ी रहीं, जिन्होंने कार्यक्रम की गरिमा में अपनी उपस्थिति से चार चांद लगाए।
इस प्रकार, यह आयोजन लोक संस्कृति और आस्था के प्रतीकात्मक त्योहारों के प्रति जनमानस में जागरूकता उत्पन्न करने में मील का पत्थर साबित हुआ।















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