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अवैध कोयला कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए ड्रोन निगरानी योजना का ठप होना चिंताजनक

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आसनसोल :  आसनसोल और आसपास के क्षेत्रों में अवैध कोयला खनन और परिवहन पर रोक लगाने के लिए आरंभ की गई ड्रोन निगरानी योजना अपने आरंभिक चरण में अत्यधिक प्रभावशाली सिद्ध हुई थी। यह आधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए दुर्गम और संवेदनशील खनन क्षेत्रों में अवैध गतिविधियों पर निगरानी रखने का एक सशक्त प्रयास था। परंतु, हालिया घटनाक्रमों के तहत इस योजना के बंद हो जाने की खबर ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।ड्रोन योजना: आरंभ और उद्देश्य :- अवैध कोयला कारोबार पर नियंत्रण के लिए ड्रोन निगरानी योजना को एक अभिनव पहल के रूप में शुरू किया गया था।

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इस योजना के तहत निम्नलिखित प्रमुख उद्देश्यों को ध्यान में रखा गया था: 1. अवैध खनन की निगरानी: पारंपरिक गश्ती प्रणालियों की सीमाओं को ध्यान में रखते हुए, ड्रोन का उपयोग उन दुर्गम स्थानों पर किया गया, जहाँ पहुँच पाना कठिन था। 2. रियल-टाइम जानकारी: ड्रोन की तकनीकी विशेषताओं का लाभ उठाते हुए वास्तविक समय में अवैध गतिविधियों का पता लगाने और उन पर कार्रवाई सुनिश्चित करना। 3. पर्यावरण संरक्षण: अवैध खनन से पर्यावरण को होने वाले नुकसान को कम करना और संसाधनों के संरक्षण में सहायता करना। योजना बंद होने के संभावित कारण: ड्रोन योजना का अचानक बंद होना प्रशासनिक कमजोरी, तकनीकी सीमाओं या राजनीतिक दबाव का परिणाम हो सकता है। इसके पीछे निम्नलिखित संभावनाएँ प्रमुख हैं: 1. रखरखाव और संसाधनों की कमी: ड्रोन के संचालन हेतु प्रशिक्षित कर्मियों, डेटा विश्लेषण प्रणाली और उचित रखरखाव के लिए पर्याप्त बजट की आवश्यकता होती है। इनकी कमी योजना पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है। 2. राजनीतिक हस्तक्षेप: अवैध कारोबार से जुड़े माफियाओं का राजनीतिक और प्रशासनिक तंत्र पर दबाव बनाना किसी भी निगरानी प्रणाली को कमजोर कर सकता है। 3. पुलिस-माफिया गठजोड़: अगर स्थानीय प्रशासन या पुलिसकर्मी अवैध कारोबार में लिप्त हों, तो ड्रोन जैसे निगरानी उपकरणों का उपयोग निष्प्रभावी हो सकता है। 4. बजटीय कटौती: ड्रोन संचालन के लिए राज्य या केंद्र सरकार द्वारा पर्याप्त बजट आवंटित किया जाना आवश्यक है। बजट कटौती से योजना बाधित हो सकती है। 5. कार्रवाई में ढिलाई: ड्रोन से प्राप्त जानकारी का उपयोग तत्काल और ठोस कार्रवाई के लिए होना चाहिए। अगर इस दिशा में प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो योजना का उद्देश्य असफल हो सकता है। योजना बंद होने के परिणाम: ड्रोन निगरानी योजना बंद होने का सीधा प्रभाव अवैध कोयला कारोबार और पर्यावरणीय संतुलन पर पड़ा है। इसके प्रमुख दुष्परिणाम निम्नलिखित हैं: 1. अवैध खनन में वृद्धि: ड्रोन निगरानी के अभाव में माफियाओं को खुली छूट मिल गई है। 2. जनता का प्रशासन पर अविश्वास: ऐसी योजनाओं का रुक जाना यह संकेत देता है कि प्रशासन अवैध कारोबार को रोकने में गंभीर नहीं है। 3. पर्यावरण और राजस्व का नुकसान: अवैध खनन से स्थानीय पर्यावरण को गंभीर क्षति पहुँचती है,

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वहीं सरकारी राजस्व को भी भारी घाटा होता है। क्या हो समाधान? :-1. पुनः प्रारंभ करें योजना: ड्रोन निगरानी को दोबारा आरंभ किया जाए और इसके संचालन के लिए प्रशिक्षित कर्मियों और पर्याप्त बजट का प्रावधान हो। 2. स्वतंत्र एजेंसियों को जिम्मेदारी दें: ड्रोन से प्राप्त डेटा का विश्लेषण और कार्रवाई के लिए पुलिस के साथ स्वतंत्र निगरानी एजेंसियों को भी शामिल किया जाए। 3. जन भागीदारी बढ़ाएँ: स्थानीय जनता को अवैध खनन की जानकारी देने के लिए प्रोत्साहित किया जाए। 4. राजनीतिक इच्छाशक्ति मजबूत करें: प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को अवैध कारोबार रोकने के लिए ठोस और कड़े निर्णय लेने होंगे। ड्रोन जैसी अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने में अति प्रभावी हो सकता है। इस योजना का बंद होना एक गंभीर चिंता का विषय है। प्रशासन को चाहिए कि वह इसकी असफलता के कारणों की जाँच कर इसे पुनः सशक्त रूप से लागू करे।

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