
आसनसोल : यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के सैंथिया शाखा के पूर्व प्रबंधक शरद चंद को रिश्वतखोरी के मामले में आसनसोल सीबीआई विशेष अदालत ने दोषी करार देते हुए चार साल के कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। विशेष न्यायाधीश राजेश चक्रवर्ती ने जुर्माना अदा न करने पर तीन माह की अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतने का भी आदेश दिया।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, मामला 13 मई 2015 का है, जब बैंक अधिकारी ने शिकायकर्ता प्रणय मुखर्जी से 5,000 रुपये की रिश्वत मांगी थी। शिकायकर्ता के पिता सेना में कार्यरत थे, जिनकी मृत्यु के बाद उनकी पत्नी के खाते में पेंशन चालू करने के लिए यह रिश्वत मांगी गई थी। इस संबंध में शिकायकर्ता ने कोलकाता सीबीआई की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा को शिकायत दर्ज कराई थी।

सीबीआई ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जाल बिछाया और आरोपी शरद चंद को रंगे हाथ 5,000 रुपये रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार कर लिया। मामले की जांच पूरी होने के बाद 2017 में सुनवाई शुरू हुई। अभियोजन पक्ष ने अदालत के समक्ष पुख्ता साक्ष्य और गवाह प्रस्तुत किए, जिसके आधार पर न्यायाधीश ने आरोपी को दोषी ठहराया।

सीबीआई ने अदालत में यह तर्क दिया कि आरोपी का कृत्य न केवल प्रशासनिक प्रक्रियाओं का उल्लंघन है, बल्कि यह आम जनता के विश्वास पर भी आघात करता है। अदालत ने इस तर्क को स्वीकारते हुए सख्त सजा का निर्णय लिया।
इस फैसले को भ्रष्टाचार के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अदालत ने स्पष्ट संदेश दिया कि रिश्वतखोरी जैसे अपराधों के लिए सख्त दंड सुनिश्चित किया जाएगा।















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