
आसनसोल : चित्तरंजन रेल नगरी का प्रमुख व्यापारिक केंद्र अमलादही बाजार धीरे-धीरे वीरान होने की कगार पर है। 10 दिसंबर को प्रशासन ने 105 अनाधिकृत दुकानों को ध्वस्त करने का कार्य शुरू किया। सुबह से ही बाजार का मुख्य भाग, जिसमें फल पट्टी, ऊपरी बाजार के दर्जी और कपड़े की दुकानें शामिल हैं, उजड़ता नजर आया।

प्रशासन ने पहले ही इन दुकानों को हटाने का नोटिस जारी कर दिया था, जिसके तहत कई व्यापारियों ने अपनी दुकान का सामान निकाल लिया और अतिक्रमण हटाने का कार्य स्वयं कर लिया। हालांकि, कुछ फल और फूल विक्रेता सुबह तक अपनी दुकानों में जमे रहे, लेकिन 40 आरपीएफ कर्मियों, छह महिला आरपीएफ जवानों और दो जेसीबी मशीनों की कार्रवाई के सामने उनकी दुकानें धराशायी हो गईं।
गौरतलब है कि इस बार प्रशासन ने 22 ठेका कर्मियों की एक विशेष टीम को तैनात किया, जो उन गलियों में हाथों से हथौड़ा और सब्बल के जरिए दुकानों को तोड़ रही है, जहां जेसीबी मशीनें नहीं पहुंच सकतीं। लंबे समय से स्थापित इस बाजार को उजड़ते देख व्यापारी वर्ग में गहरा असंतोष व्याप्त है।

आज सुबह अमलादही बाजार व्यापारी समिति ने विरोध प्रदर्शन किया। उनका कहना है कि पिछले उच्छेदन अभियान के दौरान आरआईसी के सामने एक वैध दुकान का हिस्सा क्षतिग्रस्त हुआ था, जिसे सुधारने का आश्वासन दिया गया था। लेकिन 12 दिन बीतने के बाद भी मरम्मत का कार्य शुरू नहीं हुआ। समिति ने आज फिर से रेल प्रशासन से इस मामले में शीघ्र कार्रवाई की मांग की। सीएलडब्ल्यू के आईओडब्ल्यू विभाग ने क्षतिग्रस्त दुकान को जल्द सुधारने का आश्वासन दिया है।
इधर, अमलादही बाजार व्यापारियों ने आज दोपहर बाद बाजार बंद रखने का निर्णय लिया। यह कदम एक व्यापारी की मृत्यु पर शोक व्यक्त करने के लिए उठाया गया है। प्रशासन की सख्ती और व्यापारियों की पीड़ा के बीच बाजार का भविष्य अंधकारमय दिखाई दे रहा है।















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