
रानीगंज : रानीगंज गर्ल्स कॉलेज में सोमवार से केंद्र सरकार के युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय के तत्वावधान में सात दिवसीय राष्ट्रीय एकता शिविर (नेशनल इंटीग्रेशन कैंप-2024) का भव्य शुभारंभ हुआ। इस कार्यक्रम का उद्घाटन उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी, कॉलेज की प्राचार्या डॉ. छवि दे, एनएसएस के क्षेत्रीय निदेशक विनय कुमार, बीबी कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अमिताभ बसु, स्थानीय विधायक एवं गर्वनिंग बॉडी के अध्यक्ष तापस बनर्जी, मालिया मेमोरियल सोसाइटी के सदस्य अनुराधा मालिया सराफ, सनिया मालिया और बिठ्ठल नाथ मालिया ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।

शिविर में देश के 17 राज्यों से 210 प्रतिनिधि शामिल हुए, जिन्हें समाजसेवा और राष्ट्रीय एकता के विचारों को आत्मसात करने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। उद्घाटन समारोह में भगत सिंह कोश्यारी ने अपने संबोधन में कहा, “राष्ट्रीय सेवा हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए। यदि हम स्वार्थ त्यागकर समाज की सेवा में जुटें, तो राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ किया जा सकता है।” उन्होंने जगतगुरु शंकराचार्य और बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के उदाहरण देकर बताया कि हमारी विविधताओं में एकता की जड़ें ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से कितनी गहरी हैं।
कोश्यारी ने 370 अनुच्छेद हटाने को देश की एकता की दिशा में मील का पत्थर बताया। उन्होंने संस्कृत और भारतीय भाषाओं के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि हमें अपनी जड़ों से जुड़ना चाहिए। स्वच्छता और स्थानीय भाषाओं को प्राथमिकता देने की बात करते हुए उन्होंने कहा, “स्वच्छ भारत अभियान हो या भाषाई सम्मान, यह राष्ट्रीय गौरव की पहचान है।”

विधायक तापस बनर्जी ने विविधता में एकता की भारतीय परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा, “हमारी 390 से अधिक भाषाएं, संस्कृतियां और परंपराएं हमारी ताकत हैं। बंदे मातरम का स्वर हर भारतीय को एक सूत्र में बांधता है।”
कार्यक्रम में मालिया मेमोरियल सोसाइटी की अहम भूमिका रही। अनुराधा मालिया सराफ ने कहा, “राष्ट्रीय एकता का संस्कार बचपन से शुरू होना चाहिए। हमें बच्चों को ऐसी शिक्षा देनी चाहिए जो देशभक्ति और राष्ट्रीय पहचान को बढ़ावा दे।”
समारोह में धन्यवाद ज्ञापन तुषार कांति बनर्जी ने दिया। यह शिविर युवा प्रतिनिधियों के लिए एक प्रेरणादायक मंच बनकर राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करेगा।















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