
आसनसोल : आसनसोल नगर निगम के 41 नंबर वार्ड के पार्षद जीतू सिंह ने आगामी 19 दिसंबर को निगम की बोर्ड बैठक के बहिष्कार का ऐलान किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बैठक में जाने से कोई सार्थक परिणाम नहीं निकलता क्योंकि उन्हें सच्चाई को उजागर करने से रोका जाता है। पार्षद जीतू सिंह ने खुद को तृणमूल कांग्रेस का निष्ठावान कार्यकर्ता और जनप्रतिनिधि बताते हुए कहा कि उनकी जिम्मेदारी है कि क्षेत्र की समस्याओं को नगर निगम के मेयर तक पहुंचाया जाए।
उन्होंने नगर निगम की वित्तीय स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि राजस्व वसूली में भारी गिरावट के कारण विकास कार्य बाधित हो रहे हैं। जीतू सिंह ने आरोप लगाया कि जब भी उन्होंने राजस्व वसूली और अवैध निर्माण के मुद्दे को बैठक में उठाया, उन्हें बोलने नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि इसीलिए अब बोर्ड बैठक में भाग लेने का कोई औचित्य नहीं बचा है।

पार्षद ने कहा कि आसनसोल नगर निगम के मेयर विधान उपाध्याय ने स्वयं 13 दिसंबर को घोषणा की थी कि अवैध निर्माण और बकाया राजस्व वसूली के लिए 15 दिन का समय दिया जाएगा। निगम के 511 करोड़ रुपये बकाया हैं। यदि यह राशि वसूल ली जाए, तो आने वाले दो वर्षों तक विकास कार्यों के लिए संसाधनों की कमी नहीं होगी।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का भी स्पष्ट निर्देश है कि प्रत्येक नगर निगम आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बने और अपने पैरों पर खड़ा हो। इसके लिए राजस्व वसूली को प्राथमिकता देना अत्यंत आवश्यक है। किंतु यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि मेयर विधान उपाध्याय, एक अच्छे व्यक्ति होने के बावजूद, कुछ सार्थक कार्य नहीं कर पा रहे हैं। इसका मुख्य कारण यह है कि उनके आसपास ऐसे लोग जमा हो गए हैं, जो उन्हें वास्तविक तस्वीर से गुमराह कर रहे हैं।

जीतू सिंह ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि मेयर को “चमचों” के घेरे से बाहर निकलकर वास्तविकता का सामना करना होगा। उन्होंने विश्वास जताया कि यदि मेयर विधान उपाध्याय और मंत्री मलय घटक मिलकर काम करें, तो आसनसोल नगर निगम क्षेत्र का संपूर्ण विकास संभव है। उन्होंने मलय घटक को गरीबों का मसीहा बताया और कहा कि उनकी भी इच्छा है कि क्षेत्र का विकास हो, किंतु कुछ निचले स्तर के अधिकारियों की निष्क्रियता के चलते राजस्व वसूली में गिरावट आ रही है।
पार्षद जीतू सिंह ने कहा कि वह हमेशा सच्चाई के पक्ष में खड़े रहते हैं और यही कारण है कि उन्होंने निगम की बैठकों में शामिल होना छोड़ दिया है। उन्होंने ममता बनर्जी के आदर्शों का पालन करते हुए कहा कि सच्चाई पर चलकर ही बदलाव संभव है। उन्होंने निगम प्रशासन से मांग की कि राजस्व वसूली प्रक्रिया को दुरुस्त कर विकास कार्यों को प्राथमिकता दी जाए।















Users Today : 13
Users Yesterday : 64