

दुर्गापुर : पश्चिम बंगाल के फरीदपुर ब्लॉक स्थित जेमुआ वडुबाला विद्यापीठ ने मध्याह्न भोजन (मिड-डे मील) को लेकर एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है। जहां एक ओर राज्य के विभिन्न हिस्सों से मिड-डे मील में भ्रष्टाचार की खबरें आती रहती हैं, वहीं इस विद्यालय ने पारदर्शिता और आत्मनिर्भरता का अनूठा मॉडल अपनाया है।
विद्यालय परिसर में बने बगीचे में आलू, प्याज, टमाटर, गोभी, पालक समेत बीस प्रकार की सब्जियों की खेती की जाती है। शिक्षकों और छात्रों द्वारा सुबह स्कूल पहुंचने के बाद सबसे पहले बगीचे की देखभाल की जाती है। इसके बाद ताजी सब्जियां मध्याह्न भोजन तैयार करने के लिए दी जाती हैं।

यह विद्यालय कक्षा आठवीं तक नहीं, बल्कि बारहवीं तक के छात्रों के लिए भी मिड-डे मील उपलब्ध कराता है। सरकारी नियमों के अनुसार, मध्याह्न भोजन केवल आठवीं कक्षा तक के छात्रों को ही दिया जाता है, लेकिन इस विद्यालय में बारहवीं तक के सभी 1200 छात्रों को प्रतिदिन पौष्टिक भोजन परोसा जाता है।
विद्यालय के इस प्रयास से न केवल छात्रों को स्वस्थ और संतुलित भोजन मिलता है, बल्कि बागवानी के माध्यम से छात्रों में श्रम और स्वावलंबन की भावना भी विकसित हो रही है। यह पहल अन्य विद्यालयों के लिए प्रेरणास्रोत बन सकती है।

विद्यालय के इस प्रयास की पूरे क्षेत्र में सराहना हो रही है। यह दिखाता है कि जब शिक्षकों और छात्रों का सामूहिक प्रयास होता है, तो सीमित संसाधनों में भी अनुकरणीय परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं। इस मॉडल को पूरे राज्य में अपनाए जाने की आवश्यकता है ताकि शिक्षा के साथ पोषण और स्वावलंबन की भावना को बढ़ावा मिले।















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