
रानीगंज : शिल्पांचल का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व रखने वाला बड़दही तालाब अब विवादों के घेरे में है। यह तालाब न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि इसकी सांस्कृतिक और सामाजिक भूमिका भी अप्रतिम है। लेकिन अब इसका क्षेत्रफल धीरे-धीरे सिमटता जा रहा है। इस मामले को लेकर आसनसोल नगर निगम के वार्ड 36 के पार्षद एवं एमआईसी दिव्येन्दु भगत और प्रमोटर अरविंद लोहारुवाला के बीच विवाद गहराता जा रहा है।
तालाब के क्षेत्रफल में कमी का आरोप
पार्षद दिव्येन्दु भगत ने आरोप लगाया है कि बड़दही तालाब, जो कभी 32 बीघा क्षेत्रफल में विस्तारित था, अब मात्र 22 बीघा में सिमट गया है। उन्होंने दावा किया है कि बीएलएलआरओ के रिकॉर्ड के अनुसार तालाब का कुल क्षेत्रफल 10.64 एकड़ था, लेकिन अतिक्रमण और भरावट के कारण यह अब केवल 7.50 एकड़ रह गया है। भगत का आरोप है कि प्रमोटर अरविंद लोहारुवाला ने तालाब के हिस्से को भरकर उसे वास्तु और व्यावसायिक उपयोग के लिए परिवर्तित कर दिया है।
डिमार्केशन और कानूनी कार्रवाई की चेतावनी
गुरुवार को आसनसोल नगर निगम और बीएलएलआरओ के अधिकारियों की एक संयुक्त टीम ने तालाब का सर्वेक्षण कर डिमार्केशन किया। इस दौरान तालाब की सीमाओं को चिन्हित कर खूंटियां गाड़ी गईं। भगत ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि डिमार्केशन रिपोर्ट आने के बाद लोहारुवाला के खिलाफ नोटिस जारी कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
प्रमोटर का बचाव
दूसरी ओर, प्रमोटर अरविंद लोहारुवाला ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि तालाब के क्षेत्रफल में कोई कमी नहीं हुई है और यह पूरी तरह उनकी निजी संपत्ति है। उन्होंने कहा कि न तो इस जमीन पर कोई फ्लैट बनाया गया है और न ही कोई झोपड़ी। उन्होंने दावा किया कि वह अपनी संपत्ति का एक हिस्सा नगर निगम को दान करने के लिए तैयार हैं, जिससे तालाब का विकास सुनिश्चित हो सके।

पुराने रिकॉर्ड पर विवाद
लोहारुवाला ने यह भी कहा कि बड़दही तालाब के पास बना पार्क भी तालाब की जमीन पर ही निर्मित है, जो अपने आप में अवैध है। उन्होंने इस बात पर खेद व्यक्त किया कि नगर निगम और बीएलएलआरओ ने उनकी सहमति के बिना डिमार्केशन की प्रक्रिया शुरू की।
आरोप-प्रत्यारोप जारी
पार्षद दिव्येन्दु भगत जहां इसे बड़दही तालाब के अस्तित्व पर खतरा मानते हैं, वहीं लोहारुवाला ने कहा कि 40 साल पहले तालाब का क्षेत्रफल जितना था, आज भी उतना ही है। उन्होंने किसी भी गैरकानूनी गतिविधि में शामिल होने से इनकार करते हुए कहा कि यदि आवश्यक हुआ तो वह न्यायालय की शरण लेंगे।
बड़दही तालाब का यह विवाद न केवल नगर निगम और प्रमोटर के बीच टकराव को उजागर करता है, बल्कि रानीगंज की सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
















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