
अंडाल : पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर स्थित फरिदपुर थाने में आदिवासी समुदाय के लोगों ने पांच युवकों को झूठे मुकदमे से मुक्त करने की मांग को लेकर थाने में विरोध प्रदर्शन किया। इस घटना ने थाने में सनसनी फैलाते हुए तनावपूर्ण माहौल उत्पन्न कर दिया। पुलिस ने इस विरोध को शांत करने के लिए आस-पास के थानों से अतिरिक्त बल मंगवाया और स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए कम्बैट फोर्स को तैनात किया।
घटना दुर्गापुर के फरिदपुर थाना क्षेत्र स्थित नवघनपुर आदिवासी बस्ती में घटित हुई, जब पुलिस ने एक नाबालिग सहित पांच आदिवासी युवकों को कोयला चोरी के आरोप में गिरफ्तार किया। इन युवकों पर कोयला चोरी का आरोप लगाया गया था, जबकि उनमें से एक की उम्र महज 15 वर्ष थी और बाकी सभी छात्र थे। गिरफ्तार किए गए युवकों को शुक्रवार को दुर्गापुर महाकुमा न्यायालय में पेश किया गया, जहां उन्हें जमानत मिल गई।

इन युवकों की गिरफ्तारी से आदिवासी समुदाय में आक्रोश फैल गया और शुक्रवार की सुबह 10 बजे के आसपास बड़ी संख्या में आदिवासी समुदाय के लोग तीर-धनुष लेकर थाने के बाहर जमा हो गए। उन्होंने थाने का घेराव करते हुए उग्र प्रदर्शन शुरू किया। इस विरोध में स्थानीय निवासी भी शामिल हो गए। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस के खिलाफ नारेबाजी की और उनके द्वारा किए गए कृत्य को अनुचित और झूठा बताया।
विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व करने वाले फूलमणि सरन और स्वतंत्र रुईदास ने कहा कि इन युवकों को केवल इसलिए गिरफ्तार किया गया क्योंकि वे शौच के लिए तालाब गए थे। उन्होंने बताया कि उनके घरों में शौचालय नहीं था और इस कारण से उन्हें प्राकृतिक आवश्यकता के तहत तालाब में जाना पड़ा, जहां से उन्हें गिरफ्तार किया गया। इन नेताओं ने आरोप लगाया कि पुलिस ने इन युवकों को झूठे आरोपों में फंसा दिया है और कोयला चोरी का मामला बिल्कुल निराधार है।

विरोध करने वालों ने कहा कि इन युवकों का भविष्य उज्जवल था, लेकिन पुलिस के झूठे आरोपों के कारण उनका जीवन संकट में पड़ सकता है। उन्होंने दावा किया कि पुलिस द्वारा दर्ज किए गए इस झूठे मुकदमे के कारण इन युवकों को भविष्य में गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ेगा। इसके विरोध में उन्होंने सभी की निःस्वार्थ रिहाई की मांग की।
इस उग्र प्रदर्शन को देखते हुए थाना परिसर में तनाव का माहौल उत्पन्न हो गया। स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए पुलिस ने आसपास के थानों से अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की। हालांकि पुलिस ने झूठे मुकदमे के आरोपों को नकारते हुए कहा कि गिरफ्तारियों में कोई गड़बड़ी नहीं थी। लगभग 12 बजे पुलिस अधिकारियों की मध्यस्थता से विरोध प्रदर्शन समाप्त हुआ, लेकिन आदिवासी समुदाय के बीच असंतोष की स्थिति बनी रही।















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