
आसनसोल : चित्तरंजन रेलनगरी का प्रमुख प्राकृतिक पर्यटन स्थल हिलटॉप इन दिनों अवैध वृक्ष कटाई के कारण अपने हरे-भरे स्वरूप से वंचित हो रहा है। शाल, शीशम, सोनाझुरी तथा अन्य महत्वपूर्ण वृक्षों की अंधाधुंध कटाई ने पर्यावरण प्रेमियों एवं स्थानीय नागरिकों को गहरी चिंता में डाल दिया है।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सैकड़ों वृक्षों को निर्ममता से काटा गया है, कुछ वृक्षों को जड़ से उखाड़ दिया गया, जबकि अन्य को इस प्रकार छाँटा गया कि वे शीघ्र ही नष्ट हो जाएँ। एक समय हरीतिमा से परिपूर्ण यह पर्वतीय स्थल अब वृक्षविहीन, उजाड़ एवं नंगे पहाड़ में तब्दील हो चुका है। इस ह्रास को देख पर्यटकों की आँखें नम हो गईं।

चित्तरंजन रेल नगरी को अपनी हरित संपदा एवं स्वच्छता के लिए ‘स्वर्ण मयूरी’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। यहाँ के विशाल जलाशय एवं घने वृक्ष इसकी विशिष्ट पहचान रहे हैं। किन्तु, आरपीएफ एवं पुलिस की उपस्थिति के बावजूद इस प्रकार व्यापक स्तर पर वृक्षों की अवैध कटाई एक गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करती है। वन विभाग की अनुमति के बिना वृक्षों की कटाई अवैध एवं पर्यावरणीय अपराध की श्रेणी में आती है, परंतु प्रशासनिक स्तर पर अब तक कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया है।
स्थानीय नागरिकों के अनुसार, 8 फरवरी दोपहर को संगठित समूहों द्वारा बड़ी संख्या में वृक्ष काटे जाने की घटना देखी गई। इस गंभीर स्थिति से व्यथित पर्यावरण प्रेमियों ने रूपनारायणपुर स्थित आसनसोल टेरिटोरियल रेंज कार्यालय से संपर्क करने का प्रयास किया।

मामले की सूचना पाकर दुर्गापुर वन प्रभाग के प्रभागीय वन अधिकारी (DFO) अनूपम खान ने स्थिति का संज्ञान लेते हुए रेंज अधिकारी को स्थल निरीक्षण का निर्देश दिया। परंतु, वन विभाग द्वारा अब तक वृक्ष कटाई रोकने हेतु कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, जिससे नागरिकों में रोष व्याप्त है।
वृक्षों की यह निर्ममता न केवल पर्यावरणीय असंतुलन को जन्म देगी, बल्कि इससे क्षेत्र का तापमान भी बढ़ेगा। यह क्षेत्र अनेक पक्षियों एवं वन्य जीवों का प्राकृतिक आवास रहा है, जो अब संकट में पड़ गया है। यदि शीघ्र हस्तक्षेप नहीं किया गया तो चित्तरंजन हिलटॉप अपनी प्राकृतिक संपदा एवं पर्यटन महत्व पूरी तरह खो देगा।















Users Today : 41
Users Yesterday : 14