
आसनसोल : बंगाल चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (BCC&I) के तत्वावधान में एवं आसनसोल इंजीनियरिंग कॉलेज के सहयोग से औद्योगिक क्षेत्र की पारिस्थितिक स्थिरता पर केंद्रित आठवां संस्करण परिचर्चा मंच आज कॉलेज परिसर में संपन्न हुआ। इस महत्वपूर्ण आयोजन में पश्चिम बंगाल सरकार के विधि एवं श्रम विभाग के मंत्री मलय घटक, आसनसोल इंजीनियरिंग कॉलेज के प्राचार्य डॉ. जी.एस. पांडा, बंगाल चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के पूर्व अध्यक्ष गौतम राय, स्टील प्लांटेक इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के एसोसिएट डायरेक्टर (एचआर) पार्थ पी. चट्टराज सहित अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने कार्यक्रम का उद्घाटन किया।
दुर्गापुर-आसनसोल औद्योगिक क्षेत्र की महत्ता पर बल
मुख्य अतिथि के रूप में अपने उद्घाटन संबोधन में मंत्री मलय घटक ने दुर्गापुर-आसनसोल औद्योगिक क्षेत्र बेल्ट को भारत की औद्योगिक अर्थव्यवस्था की रीढ़ करार दिया। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र राज्य और देश की औद्योगिक प्रगति में अहम भूमिका निभाता है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि इस वर्ष आयोजित बंगाल ग्लोबल बिजनेस समिट ने निवेशकों का व्यापक ध्यान आकर्षित किया है। इसके परिणामस्वरूप, इस क्षेत्र में नए उद्योगों के विस्तार एवं सतत विकास की संभावनाएं बढ़ रही हैं, जिससे रोजगार सृजन को भी बढ़ावा मिलेगा।

पर्यावरणीय संतुलन और नवाचार की आवश्यकता
बंगाल चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के पूर्व अध्यक्ष गौतम राय ने मंच की कार्यसूची निर्धारित करते हुए औद्योगिक क्षेत्रों में उत्सर्जन नियंत्रण उपायों को लागू करने की अपरिहार्यता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वातावरणीय प्रदूषण एवं संसाधनों के अत्यधिक दोहन को रोकने के लिए नवाचार आवश्यक है। औद्योगिक प्रगति और आर्थिक आत्मनिर्भरता को बनाए रखते हुए सतत विकास के मार्ग को अपनाना ही वर्तमान समय की मांग है।
श्री राय ने यह भी सुझाव दिया कि BCCI को क्षेत्र के उद्योगपतियों एवं विशेषज्ञों से इनपुट एकत्र कर नीतिगत सिफारिशें तैयार करनी चाहिए। इससे सरकार और औद्योगिक इकाइयों को दीर्घकालिक नीति निर्धारण में मदद मिलेगी।
औद्योगिक विकास और पर्यावरणीय चुनौतियां
औद्योगिकरण के विस्तार के साथ पारिस्थितिकीय असंतुलन की चुनौतियां भी बढ़ रही हैं। स्टील प्लांटेक इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के एसोसिएट डायरेक्टर पार्थ पी. चट्टराज ने कहा कि औद्योगिक उत्सर्जन को नियंत्रित करने, जल एवं ऊर्जा संरक्षण की दिशा में प्रभावी कदम उठाने और हरित तकनीकों को अपनाने की जरूरत है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि उद्योगों को सतत विकास लक्ष्यों (Sustainable Development Goals – SDG) के अनुरूप नीतियां अपनानी होंगी ताकि पर्यावरण संरक्षण और औद्योगिक समृद्धि साथ-साथ सुनिश्चित की जा सके।

नीतिगत हस्तक्षेप और भविष्य की दिशा
परिचर्चा मंच में उपस्थित विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं ने एकमत से इस बात पर जोर दिया कि सरकार, उद्योग, शिक्षा और शोध संस्थानों के बीच सहयोग को सुदृढ़ किया जाए। इसके लिए शोध एवं विकास (R&D), अपशिष्ट प्रबंधन, कार्बन उत्सर्जन नियंत्रण और नवीकरणीय ऊर्जा संसाधनों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
कार्यक्रम में उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, शिक्षाविदों और पर्यावरणविदों की भागीदारी से यह स्पष्ट हुआ कि सतत औद्योगिक विकास के लिए समावेशी दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत है। इस अवसर पर आसनसोल-दुर्गापुर औद्योगिक क्षेत्र में पर्यावरण-संवेदनशील औद्योगिकरण को बढ़ावा देने के लिए BCC&I ने विस्तृत नीतिगत सिफारिशें तैयार करने की घोषणा की।
परिचर्चा में उठाए गए बिंदुओं से यह स्पष्ट हुआ कि औद्योगिक विस्तार और पर्यावरणीय सततता को संतुलित करने के लिए ठोस रणनीति आवश्यक है। यह मंच उद्योगों के लिए एक नई सोच और मार्गदर्शन प्रदान करेगा, जिससे आसनसोल-दुर्गापुर औद्योगिक क्षेत्र पारिस्थितिक संतुलन के साथ सतत विकास की दिशा में अग्रसर हो सकेगा।















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