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जल संकट से जूझता चातालडांगा, प्यास से बिलखते आदिवासी

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ghanty

दुर्गापुर :  ग्रीष्म ऋतु की आहट सुनाई देने लगी है। सूर्य की प्रखरता दिन-ब-दिन बढ़ रही है, परंतु चातालडांगा के आदिवासी परिवारों के लिए यह ऋतु जल संकट का भयावह संदेश लेकर आई है। गोपालपुर पंचायत अंतर्गत इस गांव में जल संकट चरम पर पहुंच चुका है। वर्षों से इस समस्या से जूझ रहे ग्रामवासियों की पीड़ा न तो पंचायत के नुमाइंदों तक पहुंची है और न ही प्रशासन के किसी अधिकारी ने इसे संजीदगी से लिया है।

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संकटग्रस्त जीवन, प्रशासन की बेरुखी

ग्रामवासियों का स्पष्ट आरोप है कि पंचायत में कई बार गुहार लगाने के बावजूद उनकी समस्या का निराकरण नहीं किया गया। उन्हें यह विश्वास होने लगा है कि सरकार और प्रशासन उन्हें इंसान नहीं, बल्कि उपेक्षित प्रजा के रूप में देखता है। जल जीवन मिशन के तहत नल लगाए गए थे, परंतु वे केवल दिखावे तक सीमित रहे। वर्षों बीत गए, पर इनसे पानी की एक बूंद भी नहीं टपकी। गांव में लगे ट्यूबवेल भी क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। पिछले छह माह में एक ट्यूबवेल चार बार खराब हो चुका है और अब पांचवीं बार बंद पड़ा है। एक अन्य ट्यूबवेल से पानी निकलता है, परंतु वह इतना धीमा कि आधा किलोमीटर दूर से पानी लाना अधिक सुविधाजनक लगता है।

डायरिया का कहर, परंतु नहीं जागा प्रशासन

कुछ दिन पूर्व इसी पंचायत क्षेत्र के एक अन्य आदिवासी गांव में डायरिया के प्रकोप से एक व्यक्ति की मृत्यु हो गई थी। यह घटना भी प्रशासन को झकझोरने में असफल रही। चातालडांगा में भी हालात चिंताजनक हैं, परंतु समाधान की कोई पहल नहीं की गई।

प्यास से जूझती महिलाएं, संघर्षरत जीवन

आदिवासी महिलाओं का कहना है कि सुबह से पुरुष मजदूरी के लिए निकल जाते हैं और वे संध्या होते ही पानी लाने के लिए लंबी दूरी तय करने पर विवश हो जाती हैं। वे कहती हैं, “बाबूपाड़ा में सभी के पास सबमर्सिबल पंप लगे हैं, वहां पंचायत ने अतिरिक्त सुविधा भी दी, परंतु हमारे लिए कुछ नहीं। क्या हम इंसान नहीं? हमें पानी चाहिए, वरना जीवन कैसे चलेगा?”

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प्रशासन की निष्ठुरता, आदिवासियों की पीड़ा

गोपालपुर पंचायत की बेरुखी और सरकार की उदासीनता ने चातालडांगा के निवासियों को निराश कर दिया है। यह स्थिति केवल जल संकट की भयावहता ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक उपेक्षा की पराकाष्ठा को भी उजागर करती है। सवाल उठता है— क्या यह सरकार आदिवासियों की पीड़ा को सुनेगी, या वे यूं ही जल संकट के दलदल में फंसे रहेंगे?

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