
आसनसोल : चिकित्सा के क्षेत्र में एक उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए आसनसोल जिला अस्पताल के चिकित्सकों ने एक अत्यंत जटिल और जोखिमपूर्ण शल्यक्रिया को सफलतापूर्वक संपन्न किया, जिससे एक महिला को नया जीवन प्राप्त हुआ। लीवर में स्थित 14 सेंटीमीटर लंबे ट्यूमर को शल्यचिकित्सा द्वारा निकालकर डॉक्टरों ने असंभव को संभव कर दिखाया।
विस्तृत चिकित्सकीय प्रक्रिया और कठिनाइयाँ
अस्पताल अधीक्षक डॉ. निखिल चंद्र दास ने मंगलवार को आयोजित पत्रकार वार्ता में बताया कि बीरभूम निवासी बबीता साव मंडल, जो लंबे समय से अत्यंत कष्टदायक पेट दर्द और पेट फूलने की समस्या से ग्रसित थीं, 7 फरवरी को अस्पताल में भर्ती हुईं। इससे पूर्व उन्होंने कई चिकित्सकों से परामर्श लिया था, किंतु उन्हें कोई लाभ नहीं मिला। आर्थिक संसाधनों की सीमित उपलब्धता के कारण वे किसी निजी चिकित्सा संस्थान में उपचार करवाने में असमर्थ थीं। जब उन्हें आसनसोल जिला अस्पताल में इस रोग के उपचार की संभावना का पता चला, तो उन्होंने यहाँ भर्ती होने का निर्णय लिया।

भर्ती के पश्चात् ऑन्कोलॉजिस्ट, गायनेकोलॉजिस्ट, जनरल फिजिशियन सहित विभिन्न विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा उनके स्वास्थ्य परीक्षण किए गए। प्रारंभिक जांच में पेट में ट्यूमर की उपस्थिति की पुष्टि हुई, जिसके आधार पर शल्यक्रिया का निर्णय लिया गया। किंतु ऑपरेशन के दौरान चिकित्सकों ने पाया कि ट्यूमर पेट में न होकर लीवर में स्थित था, जिससे यह शल्यक्रिया अत्यधिक कठिन एवं जोखिमपूर्ण हो गई।
चिकित्सकों के साहसिक निर्णय और जटिल ऑपरेशन
इस चुनौतीपूर्ण स्थिति के बावजूद, सर्जन डॉ. अमित गुप्ता और उनकी टीम ने अत्यंत सावधानीपूर्वक शल्यक्रिया करने का निर्णय लिया। उन्होंने बताया कि यह ऑपरेशन तकनीकी दृष्टि से अत्यंत दुरूह था, क्योंकि लीवर में शल्यक्रिया के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव की संभावना बनी रहती है, जिससे रोगी के जीवन को गंभीर खतरा हो सकता है।
15 फरवरी को सर्जरी का जटिल चरण पूर्ण हुआ और 14 सेंटीमीटर लंबा ट्यूमर सफलतापूर्वक निकाला गया। यह आसनसोल जिला अस्पताल के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि थी, क्योंकि इस प्रकार की उन्नत शल्यक्रिया आमतौर पर बड़े मेडिकल संस्थानों में ही संभव होती है।
रोगी और परिजनों की भावनाएँ
बबीता साव मंडल, जो अब स्वास्थ्य लाभ प्राप्त कर रही हैं, ने अस्पताल प्रशासन और चिकित्सा दल के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि यहाँ के डॉक्टरों ने उन्हें एक नया जीवन दिया है। उन्होंने विशेष रूप से डॉ. निखिल चंद्र दास, डॉ. अमित मुखर्जी और डॉ. अमित गुप्ता की सराहना की, जिनके संयुक्त प्रयासों से यह दुर्लभ चिकित्सा प्रक्रिया सफल हो सकी।
बबीता के मामा, जो ऑपरेशन के दौरान अत्यंत चिंतित थे, भावुक होकर बोले कि एक समय उन्हें लगा कि वे अपनी भांजी को खो देंगे, किंतु डॉक्टरों की कुशलता और समर्पण के कारण वह पुनः स्वस्थ हो सकीं।

जिला अस्पताल की बढ़ती चिकित्सा क्षमता
डॉ. निखिल चंद्र दास ने बताया कि हाल के वर्षों में आसनसोल जिला अस्पताल ने कई जटिल चिकित्सा प्रक्रियाओं को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है, जो पहले संभव नहीं माने जाते थे। यह उपलब्धि सरकारी चिकित्सा प्रणाली में उन्नत तकनीकी एवं कुशलता की वृद्धि को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि भविष्य में और अधिक उन्नत शल्यक्रियाओं को सफलतापूर्वक निष्पादित करने के लिए अस्पताल निरंतर प्रयासरत रहेगा।
इस सफलता ने आसनसोल जिला अस्पताल को एक महत्वपूर्ण चिकित्सा केंद्र के रूप में स्थापित किया है, जहाँ सीमित संसाधनों के बावजूद संकल्प, समर्पण और तकनीकी दक्षता के बल पर असंभव को संभव किया जा रहा है।















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