
आसनसोल : आसनसोल नगर निगम के पूर्व मेयर और भाजपा नेता जितेंद्र तिवारी ने आसनसोल कोर्ट के सीजीएम विभाग में आत्मसमर्पण किया। उनके साथ भाजपा नेता गोपीनाथ पात्रा ने भी सरेंडर किया। इस मामले में कुल पांच धाराओं के तहत आरोप दर्ज किए गए हैं, जिनमें से एक धारा गैर-जमानती (नॉन-बेलेबल) है। कोर्ट ने मामले की सुनवाई के लिए अगली तारीख तय कर दी है।

यह मामला जामुड़िया के दरबा डांगा घाट पंप हाउस से जुड़ा है, जहां कुछ दिन पहले जितेंद्र तिवारी पर असामाजिक तत्वों ने हमला किया था। तिवारी ने दावा किया था कि वह पंप हाउस क्षेत्र में हो रहे अवैध बालू खनन और जलस्तर की स्थिति का जायजा लेने गए थे, तभी उन पर हमला किया गया। इस घटना के बाद पंप हाउस कर्मियों की ओर से उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई थी, जिसके बाद उन्होंने अदालत में आत्मसमर्पण किया।
तिवारी की गिरफ्तारी को लेकर भाजपा कार्यकर्ताओं में गहरा आक्रोश है। पार्टी समर्थकों का कहना है कि तृणमूल सरकार के इशारे पर उन्हें फंसाने की साजिश रची गई है। भाजपा का आरोप है कि राज्य में विरोधी दलों की आवाज दबाने के लिए प्रशासन का दुरुपयोग किया जा रहा है। दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस ने इन आरोपों को पूरी तरह बेबुनियाद बताते हुए कहा कि कानून अपना काम कर रहा है और तिवारी के खिलाफ दर्ज मामला तथ्यों पर आधारित है।

इस घटनाक्रम के बाद भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के बीच सियासी संग्राम और तेज हो गया है। भाजपा नेताओं ने इस मुद्दे को लेकर प्रशासन पर सवाल उठाए हैं और इसे राजनीति से प्रेरित कार्रवाई बताया है। वहीं, तृणमूल नेताओं का कहना है कि अगर तिवारी निर्दोष हैं, तो उन्हें न्यायपालिका से पूरी उम्मीद रखनी चाहिए।
राजनीतिक गलियारों में इस मामले को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। अब देखना यह होगा कि कोर्ट की अगली सुनवाई में क्या फैसला आता है और यह मामला किस दिशा में आगे बढ़ता है।















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