
आसनसोल : पश्चिम बर्धमान जिले के **रानीगंज** स्थित गिरजापाड़ा में वेस्ट बंगाल मेडिकल एंड सेल्स रिप्रेजेंटेटिव यूनियन का दूसरा सम्मेलन आयोजित किया गया। इस सम्मेलन में यूनियन के नेताओं ने चिकित्सा क्षेत्र में गहराते संकट और दवाओं की कीमतों को लेकर केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए।
सम्मेलन के उद्घाटन के दौरान यूनियन के जिला नेता बलराम चटर्जी ने अपने संबोधन में आरोप लगाया कि मोदी सरकार कॉर्पोरेट घरानों, विशेष रूप से अडानी और अंबानी जैसे उद्योगपतियों के पक्ष में काम कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार जीवन रक्षक दवाओं की कीमतों पर से जीएसटी नहीं हटा रही है, जिससे आम जनता को भारी नुकसान हो रहा है। उन्होंने दावा किया कि इलेक्टोरल बॉन्ड के ज़रिए हो रहे लेन-देन के कारण दवाओं की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं और इसके साथ ही दवा बाजार में कालाबाजारी भी बढ़ रही है।

सम्मेलन में मौजूद प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में नकली दवाओं और सलाइन का वितरण हो रहा है, लेकिन इसके बावजूद दोषी कारोबारियों पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। उन्होंने यह भी मांग की कि मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव के कामकाजी घंटों, न्यूनतम वेतन और अन्य कानूनी अधिकारों को सुनिश्चित किया जाए।
नेताओं ने ऑनलाइन दवा विक्रय को भी कठघरे में खड़ा किया और कहा कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर दवाओं के दामों में भारी छूट दी जा रही है, जिससे गुणवत्ता से समझौता किया जा रहा है और आम जनता की सेहत से खिलवाड़ हो रहा है।

सम्मेलन के मंच से 20 अप्रैल को ब्रिगेड में होने वाले श्रमिक-किसान एकता सम्मेलन में मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव यूनियन की भागीदारी सुनिश्चित करने की शपथ भी ली गई।
राज्य स्तरीय नेता सुदीप बनर्जी और संजय सन्याल सहित अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि सदस्यों के अधिकारों पर हो रहे लगातार हमलों के खिलाफ एकजुट होकर संघर्ष करना होगा।
सम्मेलन में 10 सदस्यीय नई कार्यकारिणी का गठन किया गया, जिसमें भैरव सूत्रधर को सचिव और प्रकाश मंडल को अध्यक्ष चुना गया। नए पदाधिकारियों ने भविष्य की रणनीति स्पष्ट करते हुए कहा कि वे मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेंगे।















Users Today : 19
Users Yesterday : 23