
आसनसोल : पश्चिम बंगाल में भाषाई अल्पसंख्यक समुदायों के मताधिकार पर गंभीर संकट मंडराता दिख रहा है। वेस्ट बंगाल लिंग्विस्टिक माइनॉरिटी एसोसिएशन के अध्यक्ष जितेंद्र तिवारी समेत संगठन के अन्य पदाधिकारियों ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी, चुनाव आयोग, पश्चिम बंगाल को ज्ञापन सौंपकर इस विषय पर तत्काल संज्ञान लेने की मांग की।
ज्ञापन में बताया गया कि राज्य सरकार के 27 जून 2011 के अधिसूचना क्रमांक 950-MD(V)/13M-2/08Part1 के तहत छह भाषाओं को भाषाई अल्पसंख्यक भाषा के रूप में मान्यता दी गई थी। यह मान्यता न केवल इन समुदायों की सांस्कृतिक एवं सामाजिक पहचान की सुरक्षा के लिए आवश्यक थी, बल्कि उनके संवैधानिक और राजनीतिक अधिकारों की गारंटी भी थी।

संस्था ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल की 65 विधानसभा सीटों में बड़ी संख्या में भाषाई अल्पसंख्यक मतदाता निवास करते हैं, लेकिन हाल ही में उनके नाम मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर हटा दिए गए हैं। इस प्रकार की मनमानी कार्रवाई न केवल संवैधानिक अधिकारों का हनन है, बल्कि इन समुदायों को राजनीतिक रूप से हाशिये पर डालने का प्रयास भी प्रतीत होता है।
ज्ञापन में शामिल 65 विधानसभा क्षेत्रों में आसनसोल उत्तर, आसनसोल दक्षिण, बाराबनी, दुर्गापुर पश्चिम, दुर्गापुर पूर्व, पांडवेश्वर, कुल्टी, रानीगंज, बिधाननगर, बागमुंडी, पुरुलिया सदर, रघुनाथपुर, कालचीनी, जलपाईगुड़ी, फांसीदेवा, कूचबिहार दक्षिण, इंग्लिश बाजार, खड़गपुर सदर, बाली, शिवपुर समेत अन्य क्षेत्रों का उल्लेख किया गया है।

एसोसिएशन ने चुनाव आयोग से तीन प्रमुख मांगें रखी हैं: 1. भाषाई अल्पसंख्यकों के मतदाता नाम हटाने की घटनाओं की निष्पक्ष एवं विस्तृत जांच कराई जाए।2. निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश दिया जाए कि किसी भी मान्य मतदाता का नाम अनावश्यक रूप से सूची से न हटाया जाए।3. भाषाई अल्पसंख्यकों के अधिकारों को लेकर व्यापक जनजागरण अभियान चलाया जाए ताकि वे अपने मतदाता पंजीकरण की स्थिति स्वयं सत्यापित कर सकें।
एसोसिएशन ने उम्मीद जताई कि निर्वाचन आयोग इस विषय पर शीघ्र आवश्यक कदम उठाएगा ताकि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सभी नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित की जा सके।















Users Today : 14
Users Yesterday : 23