
दुर्गापुर : पश्चिम बंगाल के जंगलों में आग की विभीषिका विकराल रूप ले रही है। वन्यजीव संकट में हैं, पर्यावरण विनाश के कगार पर खड़ा है, और स्थानीय लोग भयाक्रांत हैं। किंतु इसी प्रलयंकारी स्थिति के विरुद्ध एक 70 वर्षीय वृद्ध अपनी साइकिल पर निकला है, हाथ में चेतना का ध्वज लिए। नाम है अशोक राय, जो जंगल बचाने के लिए जन-जागृति अभियान चला रहे हैं।

हरित प्रहरी का संकल्प
अशोक राय अपने साइकिल के आगे-पीछे संदेश लिखे पोस्टर लगाए घूम रहे हैं— “जंगल में आग लगाना महापाप”, “हिरण, नीलगाय, मोर, सियार और अन्य जीवों की रक्षा करें”। वे वन विभाग को आग की सूचना देने की अपील कर रहे हैं और स्थानीय ग्रामीणों को सतर्क कर रहे हैं। उनका कहना है कि अब तक वे 5000 से अधिक वृक्ष रोपित कर चुके हैं, किंतु हर वर्ष वनाग्नि में सैकड़ों पेड़ स्वाहा हो जाते हैं।

वनाग्नि की विभीषिका
कांकसा के गढ़ जंगल में प्रतिवर्ष यह समस्या विकराल रूप धारण कर रही है। यहाँ सैकड़ों मोर, नीलगाय, सियार, हायना और अन्य दुर्लभ जीव निवास करते हैं, जो इस अग्निकांड से त्रस्त हैं। आग की लपटें कई बार आदिवासी ग्रामों तक फैलने का खतरा उत्पन्न कर देती हैं, जिससे जीवन और आजीविका दोनों संकटग्रस्त हो जाते हैं।

स्थानीयों की पीड़ा
स्थानीय महिला बुड़ी हांसदा कहती हैं, “जंगल की आग से हमें भारी नुकसान झेलना पड़ता है। शाल पत्ते इकट्ठा कर हम थाली बनाते हैं, जिससे हमारी रोजी-रोटी चलती है, किंतु अब जंगल में जाना भी मुश्किल हो गया है।” बाहरी तत्व जानबूझकर आग लगाते हैं, जिससे वन्यजीवन और पर्यावरण को अपूरणीय क्षति पहुँचती है।

संकल्प और संघर्ष
पिछले वर्ष ही अशोक राय द्वारा लगाए गए 100 आम के पौधे जलकर राख हो गए। इस हृदयविदारक घटना के बाद उन्होंने जनचेतना अभियान का बीड़ा उठाया है। वे कहते हैं, “मेरा संकल्प है कि पूरे जंगल महल क्षेत्र में यह अभियान चलाऊँगा, ताकि हर व्यक्ति इस अपराध के विरुद्ध खड़ा हो।”
वनाग्नि का संकट गहराता जा रहा है, किंतु अशोक राय जैसे निस्वार्थ पर्यावरण प्रेमी समाज के लिए प्रेरणा बन रहे हैं।















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