
चितरंजन : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीते तीन वर्षों के विदेशी दौरों पर 238 करोड़ रुपये खर्च होने की बात सामने आने के बाद इस विषय पर तीखी प्रतिक्रियाएँ आ रही हैं। इसमें 38 लाख रुपये ‘मिसलेनियस’ मद में खर्च होने का भी उल्लेख किया गया है। इस मुद्दे पर आसनसोल के सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने केंद्र सरकार पर कटाक्ष करते हुए कहा कि वह स्वयं इस आँकड़े को देखकर स्तब्ध हैं।

उन्होंने कहा कि जब शेयर बाजार में निवेशकों को अरबों का नुकसान हो रहा है, देश की अर्थव्यवस्था दबाव में है और करोड़ों लोग आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं, ऐसे में प्रधानमंत्री द्वारा किए जा रहे भारी-भरकम व्यय को उचित नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने तुलना करते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ऑक्सफोर्ड में भाषण देने के लिए आमंत्रित होती हैं, क्योंकि उनकी विद्वत्ता को विदेशों में भी मान्यता प्राप्त है, जबकि प्रधानमंत्री बिना किसी विशेष निमंत्रण के विदेश यात्राओं पर निकल पड़ते हैं और टैक्सदाताओं के धन का अपव्यय करते हैं।

सिन्हा ने तीखे स्वर में पूछा कि हाल ही में प्रधानमंत्री मॉरीशस यात्रा से देश के लिए क्या विशेष उपलब्धि लेकर लौटे? अमेरिका यात्रा के दौरान किन महत्वपूर्ण समझौतों पर सहमति बनी? उन्होंने कहा कि वास्तविकता यह है कि अमेरिका ने अपने व्यापारिक टैरिफ में इतनी वृद्धि कर दी है कि भारतीय व्यापारी परेशान हो गए हैं।

सांसद ने भाजपा सरकार को घेरते हुए कहा कि केंद्र सरकार अक्सर पाकिस्तान की आर्थिक नीतियों की आलोचना करती है, लेकिन हाल ही में जब पाकिस्तान को गहरे वित्तीय संकट का सामना करना पड़ा, तब वहाँ की सरकार ने अपने सरकारी खर्चों पर कटौती की, हवाई यात्राओं व सरकारी वाहनों पर नियंत्रण लगाया। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि कम से कम इस मामले में तो केंद्र सरकार को पाकिस्तान से कुछ सीखना चाहिए।















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