
आसनसोल : कांकुआ गांव में शनिवार को एक ही परिवार के 18 सदस्य दही-चूड़ा खाने के बाद खाद्य विषाक्तता (फूड प्वाइजनिंग) का शिकार हो गए। इनमें एक नाबालिका, एक किशोर, सात महिलाएँ और नौ पुरुष शामिल हैं। गंभीर स्थिति में 15 लोगों को आसनसोल जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जबकि एक किशोरी समेत तीन को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई।

अस्पताल सूत्रों के अनुसार, शनिवार शाम सभी 18 लोगों को गंभीर हालत में अस्पताल लाया गया था। इनमें से कई की स्थिति अत्यंत नाजुक थी। परिवार के सदस्यों ने बताया कि उन्होंने शनिवार दोपहर दही-चूड़ा खाया था, जिसके बाद उल्टी, दस्त और पेट दर्द की शिकायतें शुरू हो गईं। देखते ही देखते हालत बिगड़ने लगी, जिससे उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।

चिकित्सकों ने दी जानकारी
अस्पताल के चिकित्सकों का कहना है कि दही-चूड़ा के सेवन के कारण खाद्य विषाक्तता हुई। भोजन में किसी प्रकार की अशुद्धि या बैक्टीरियल संक्रमण होने के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई। हालांकि, फिलहाल सभी मरीजों की स्थिति स्थिर बताई जा रही है।

ये लोग हुए भर्ती
खाद्य विषाक्तता से पीड़ित परिवार के जिन 15 सदस्यों को अस्पताल में भर्ती कराया गया, उनके नाम इस प्रकार—1. तरुण चटर्जी (27),2. पापिया चटर्जी (23),3. मंदिरा चटर्जी (28),4. शाश्वती चटर्जी (32),5. नंदिनी चटर्जी (11),6. रजत चटर्जी (28),7. मानसी चटर्जी (25),8. राजेश चटर्जी (29),9. सोमा चटर्जी (25),10. सोमनाथ चटर्जी (25),11. रूपम चटर्जी (36),12. राकेश चटर्जी (37),13. पार्थ चटर्जी (46),14. सरहनाथ चटर्जी (26), 15. वर्षा गांगुली (22) है।
परिवार में हुआ था शोक, परंपरा के तहत किया गया था दही-चूड़ा का सेवन
परिवार के एक सदस्य के निधन के बाद सामूहिक रूप से दही-चूड़ा खाने की परंपरा के तहत यह भोजन तैयार किया गया था। लेकिन भोजन ग्रहण करने के कुछ समय बाद ही अधिकांश सदस्यों को स्वास्थ्य संबंधी परेशानियाँ शुरू हो गईं।
विशेषज्ञों की सलाह
चिकित्सकों का कहना है कि गर्मी और नमी के कारण खाद्य पदार्थों में बैक्टीरिया पनप सकते हैं। ऐसे में खुले में रखे या दूषित खाद्य पदार्थों के सेवन से बचना चाहिए। यदि भोजन के बाद उल्टी, दस्त या पेट दर्द जैसी समस्याएँ उत्पन्न हों, तो तत्काल चिकित्सीय परामर्श लेना आवश्यक है।















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