
बर्नपुर : भाजपा द्वारा आयोजित ‘बिहार दिवस’ समारोह को लेकर तृणमूल कांग्रेस के बोरो चेयरमैन शिवानंद बाउरी ने कटाक्ष किया है। उन्होंने इस आयोजन को बंगाल की संस्कृति के प्रति अपमानजनक करार देते हुए भाजपा और विधायक अग्निमित्रा पाल पर तीखा प्रहार किया। सोशल मीडिया पर उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में गर्मागर्म बहस छिड़ गई है। जहां भाजपा ने इसे तृणमूल कांग्रेस की संकीर्ण मानसिकता करार दिया, वहीं तृणमूल समर्थकों ने इसे बंगाल की अस्मिता का मुद्दा बताया।

बोरो चेयरमैन का विवादित बयान
शिवानंद बाउरी ने अपने पोस्ट में लिखा, “बिहार के भाजपा सांसद और आसनसोल दक्षिण विधानसभा क्षेत्र की विधायक अग्निमित्रा पाल आसनसोल में ‘बिहार दिवस’ मना रही हैं। क्या उन्हें तनिक भी लज्जा नहीं आती? वह कितनी बड़ी बंगाल-विरोधी हैं, जो बंगाल में इस प्रकार का आयोजन कर रही हैं। क्या बिहार में ‘बंगाली दिवस’ मनाया जाता है? ये बंगाल विरोधी लोग हैं, जिन्हें यहां कोई स्थान नहीं मिलना चाहिए और न ही कोई वोट।”

सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बौछार
उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं आने लगीं। भाजपा समर्थकों ने इसे बंगाल में विभाजनकारी राजनीति का हिस्सा बताया, जबकि तृणमूल समर्थकों ने इसे बंगाली अस्मिता के अपमान से जोड़ा।
अरिंदम मुखर्जी नामक एक व्यक्ति ने लिखा, “बिहार दिवस मनाना बंगाल विरोधी कैसे हो सकता है? और जो लोग बंगाल के इस हिस्से को ‘छोटा पाकिस्तान’ कहते हैं, उनके बारे में क्या कहा जाएगा?”
संगीता नोनिया चौहान ने लिखा, “अगर तृणमूल को बिहार से इतनी परेशानी है, तो उनके सांसद शत्रुघ्न सिन्हा कौन हैं?”
वहीं, भाजपा की आलोचना करते हुए कुछ लोगों ने लिखा कि “भाजपा बंगाल को बिहार में तब्दील करना चाहती है। यह लोग बंगाल का विकास नहीं कर सकते, इसलिए जातीय राजनीति कर रहे हैं।”

राजनीतिक टकराव का विस्तार
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले यह विवाद बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है। भाजपा इसे अपनी स्वीकार्यता के प्रमाण के रूप में देख रही है, जबकि तृणमूल कांग्रेस इसे बंगाली पहचान के अपमान से जोड़कर जनता को एकजुट करने का प्रयास कर रही है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि यह विवाद किन राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित करेगा और किस दल को इसका लाभ मिलेगा।















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