
आसनसोल : आसनसोल के प्रमुख सब्जी बाजार में थोक एवं खुदरा व्यापारियों के बीच उत्पन्न विवाद विकराल रूप धारण करता जा रहा है। खुदरा विक्रेताओं का आरोप है कि थोक विक्रेता अब सीधे ग्राहकों को सब्जी बेचने में संलिप्त हो गए हैं, जिससे उनका व्यवसाय चौपट होने की कगार पर पहुंच गया है। यदि प्रशासन शीघ्र हस्तक्षेप नहीं करता, तो बाजार में सब्जी संकट गहराने की आशंका है।

खुदरा व्यापारियों की व्यथा: रोज़गार संकट में
खुदरा विक्रेताओं का कहना है कि थोक व्यापारी भारी गाड़ियों में सब्जियां लाकर अब खुद ग्राहकों को बेच रहे हैं, जिसके परिणामस्वरूप छोटे व्यापारियों के पास ग्राहक आ ही नहीं रहे। सब्जी विक्रेता आकाश कुमार के अनुसार, थोक विक्रेताओं द्वारा सीधे बिक्री किए जाने से उनके जैसे सैकड़ों छोटे व्यापारियों का रोज़गार खतरे में पड़ गया है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द कोई ठोस समाधान नहीं निकाला गया, तो सभी खुदरा विक्रेता सामूहिक हड़ताल करने को बाध्य होंगे।

फल व्यापारियों की समस्या का भी नहीं हुआ समाधान
यह पहली बार नहीं है जब आसनसोल में व्यापारियों का संघर्ष उभरकर सामने आया है। पूर्व में भी फल व्यापारियों का मसला अधर में लटका रहा, जब नगर निगम ने काली पहाड़ी क्षेत्र में एक नया थोक बाजार स्थापित किया। किंतु व्यापारी वहां जाने को तैयार नहीं हुए, जिससे विवाद जस का तस बना रहा।
अब सब्जी बाजार में भी थोक एवं खुदरा व्यापारियों के बीच संघर्ष तीव्र हो गया है, जिससे न केवल व्यावसायिक अस्थिरता उत्पन्न हो रही है, बल्कि आम जनता पर भी संभावित महंगाई का संकट मंडरा रहा है।

संभावित हड़ताल और महंगाई का बढ़ता खतरा: यदि खुदरा व्यापारियों ने अपनी मांगों को लेकर हड़ताल की, तो इसका प्रत्यक्ष प्रभाव आम उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। सब्जियों की आपूर्ति बाधित हो सकती है। मूल्य वृद्धि की आशंका बलवती हो जाएगी। उपभोक्ताओं को आवश्यक वस्तुओं के लिए अधिक मूल्य चुकाना पड़ सकता है।
अब समस्त दृष्टि प्रशासन एवं नगर निगम के निर्णयों पर केंद्रित हो गई है, कि वे इस संकट को कैसे हल करेंगे और आसनसोल के व्यापारिक संतुलन को पुनर्स्थापित करने में सफल होंगे या नहीं।















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