
आसनसोल : स्थित हेल्थ वर्ल्ड अस्पताल पुनः विवादों में घिर गया है। ताजा प्रकरण में एक मरीज की मृत्यु के उपरांत उसके शव का पोस्टमार्टम किए जाने के अस्पताल प्रशासन के निर्णय पर परिजनों ने तीव्र विरोध प्रकट किया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, आसनसोल के इस्माइल क्षेत्र निवासी मोहम्मद ओबैद आलम (68) को 26 मार्च को उक्त अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बताया जाता है कि वे अपने घर में गिर गए थे, जिससे उनके मस्तिष्क में गंभीर आघात लगा था। अस्पताल में इलाज के दौरान आज प्रातः उनकी मृत्यु हो गई। चिकित्सकों ने परिजनों को सूचना देते हुए मृत्यु का कारण ‘हृदय गति रुक जाना’ (कार्डियक अरेस्ट) बताया। परिजनों ने जब शव को सुपुर्द किए जाने की मांग की, तो अस्पताल प्रशासन ने इसे ‘मेडिको लीगल’ मामला बताते हुए पोस्टमार्टम अनिवार्य बताया, जिससे परिवार में आक्रोश फैल गया।

मृतक के पुत्र मोहम्मद शादाब आलम ने बताया कि परिवार के किसी भी सदस्य ने पोस्टमार्टम की मांग नहीं की, फिर भी अस्पताल प्रशासन इसे जबरन थोप रहा है। उन्होंने आशंका व्यक्त की कि अस्पताल कुछ छिपाने का प्रयास कर रहा है। इस विवाद की सूचना मिलते ही समाजसेवी फिरोज खान ‘एफके’ मौके पर पहुंचे। उन्होंने अस्पताल प्रशासन से वार्ता कर स्थिति स्पष्ट करने का प्रयास किया, किन्तु अस्पताल अपने निर्णय पर अडिग रहा।

अस्पताल के आपातकालीन चिकित्सा अधिकारी, डॉ. औरित्र भट्टाचार्य ने बताया कि चूंकि मरीज को सिर में बाहरी चोट के कारण भर्ती किया गया था, अतः तत्काल इसकी सूचना कन्यापुर पुलिस चौकी को दी गई थी, जिससे यह मामला ‘मेडिको लीगल’ श्रेणी में आ गया। इस कारण, विधिक औपचारिकताओं के अंतर्गत पोस्टमार्टम आवश्यक है।

इस दौरान, कन्यापुर पुलिस चौकी से भी अधिकारी पहुंचे और उन्होंने भी अस्पताल प्रबंधन से चर्चा की। समाजसेवी फिरोज खान ने स्पष्ट किया कि जब तक अस्पताल प्रशासन लिखित रूप में ‘डेथ समरी’ उपलब्ध नहीं कराता, तब तक पोस्टमार्टम नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने सवाल उठाया कि मरीज की मृत्यु को चार घंटे से अधिक हो चुके हैं, फिर भी डेथ समरी जारी करने में इतनी देरी क्यों हो रही है? क्या अस्पताल प्रशासन कुछ छिपाने का प्रयास कर रहा है?
उन्होंने आरोप लगाया कि हेल्थ वर्ल्ड अस्पताल पूर्व में भी मरीजों व परिजनों के साथ गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार को लेकर विवादों में रहा है। विशेष रूप से, राज्य सरकार की स्वास्थ्य साथी योजना के अंतर्गत मरीजों को समुचित उपचार देने में अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही बरतने के आरोप लगते रहे हैं।
फिरोज खान ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब तक अस्पताल प्रशासन लिखित रूप में मृत्यु संबंधी संपूर्ण विवरण नहीं देगा, तब तक किसी भी स्थिति में पोस्टमार्टम की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अस्पताल अपनी कार्यशैली में सुधार नहीं करता, तो उसे बंद कर देना ही उचित होगा।















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