
आसनसोल: वरिष्ठ व्यवसायी सुरेन जलान ने सोशल मीडिया पर अपने विचार साझा करते हुए वक्फ बोर्ड संशोधन बिल पर हुई संसद की ऐतिहासिक बहस को भारत की लोकतांत्रिक परंपरा का महत्वपूर्ण अध्याय बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय संसद के इतिहास में यह सबसे दीर्घकालिक विमर्शों में से एक रहा, जिसके पश्चात यह विधेयक पारित हुआ।

भारतीय संस्कृति और समावेशी न्याय की मिसाल
सुरेन जलान ने भारतीय संस्कृति में व्याप्त धार्मिक सौहार्द का उदाहरण देते हुए विराट कोहली द्वारा मोहम्मद शमी की माता के चरण स्पर्श की घटना का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार भारतीय मूल्यों में परस्पर सम्मान और सह-अस्तित्व की भावना निहित है, उसी प्रकार इस विधेयक का पारित होना अल्पसंख्यक समाज, विशेषकर वंचित तबकों के लिए न्याय का मार्ग प्रशस्त करेगा।

एनडीए गठबंधन की भूमिका और विधेयक का प्रभाव
उन्होंने कहा कि एनडीए सरकार के सभी घटक दलों ने एकजुट होकर इस विधेयक को समर्थन दिया, जिससे अल्पसंख्यक महिलाओं और गरीब-वंचित समुदायों के लिए एक नई आशा का संचार हुआ है। यह संशोधन न केवल न्याय प्रणाली को मजबूत करेगा, बल्कि समाज के सभी वर्गों को समान अवसर प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

संसदीय बहस और विधेयक की ऐतिहासिकता
जलान ने इस बहस को भारतीय संसदीय इतिहास में लोकतांत्रिक विमर्श की पराकाष्ठा बताते हुए कहा कि यह विधेयक देश की सामाजिक समरसता को और सुदृढ़ करेगा। उन्होंने आशा व्यक्त की कि इस संशोधन से समाज में समानता एवं न्याय की भावना और अधिक प्रबल होगी।















Users Today : 1
Users Yesterday : 23