
आसनसोल : राजनीतिक मंच पर विपक्ष पर तीखे आरोपों की बौछार करने वाले नेता तब मौन साध लेते हैं जब प्रश्न उनकी अपनी पार्टी की नीतियों पर उठाए जाते हैं। ऐसा ही दृश्य आसनसोल दक्षिण की भाजपा विधायक अग्निमित्रा पाल के साथ तब देखने को मिला, जब गुजरात के बनासकांठा में पटाखा फैक्ट्री में हुए भयावह विस्फोट को लेकर उनसे सवाल किया गया।

दोहरी नीति का आरोप
अग्निमित्रा पाल, जो हाल के दिनों में बंगाल में पटाखा कारखानों में हो रही दुर्घटनाओं को लेकर पुलिस प्रशासन और सत्तारूढ़ दल पर गंभीर आरोप लगाती रही हैं, उन्होंने गुजरात की त्रासदी पर अनभिज्ञता जाहिर की। जबकि बंगाल के पाथरप्रतिमा में पटाखा विस्फोट की घटना पर उन्होंने फिर से प्रशासन को कठघरे में खड़ा कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि बंगाल में तीन ही उद्योग फल-फूल रहे हैं – बम और गोली का उद्योग, लॉटरी का उद्योग और शराब का उद्योग।

चुनिंदा संवेदनशीलता पर सवाल
जब पत्रकारों ने गुजरात के बनासकांठा में 18 लोगों की मृत्यु के कारण बने पटाखा कारखाने के विस्फोट पर प्रतिक्रिया मांगी, तो विधायक ने बहुत ही सुविधाजनक ढंग से यह कहकर किनारा कर लिया कि उन्हें इस घटना की जानकारी नहीं है। यह अत्यंत विस्मयकारी है कि बंगाल में किसी दुर्घटना पर एनआईए जांच की मांग करने वाले नेता अपनी ही पार्टी शासित राज्य में हुई त्रासदी पर मौन व्रत धारण कर लेते हैं।

भाजपा नेताओं की चुप्पी पर उठते सवाल
बंगाल में कानून व्यवस्था को लेकर भाजपा नेता निरंतर हमलावर रहते हैं, किंतु गुजरात में हुई उसी प्रकार की घटना पर चुप्पी अख्तियार कर लेना उनकी राजनीतिक निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। यह स्थिति राजनीतिक दोगलेपन की पराकाष्ठा को उजागर करती है और सत्ताधारी दलों के प्रति नेताओं की पक्षपातपूर्ण संवेदनशीलता पर गंभीर विमर्श की आवश्यकता को इंगित करती है।















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