
आसनसोल : उच्चतम न्यायालय द्वारा पश्चिम बंगाल में 26,000 प्राथमिक शिक्षकों की नियुक्ति को निरस्त किए जाने के पश्चात समस्त राज्य में तीव्र आक्रोश की लहर दौड़ गई है। उक्त निर्णय के विरोधस्वरूप बुधवार को आसनसोल नगर स्थित जिला निरीक्षक (डी.आई.) कार्यालय का सैकड़ों विस्थापित शिक्षकों ने घेराव कर प्रचंड प्रदर्शन किया।
प्रदर्शनकारी शिक्षकों का क्रोध प्रशासनिक व्यवस्था पर टूट पड़ा, उन्होंने न केवल सरकार के विरुद्ध तीव्र स्वर में नारेबाजी की, अपितु जिला निरीक्षक के कार्यालय कक्ष पर तालाबंदी कर प्रत्यक्ष असंतोष व्यक्त किया। ‘सरकार जवाब दो’, ‘न्याय चाहिए, नौकरी चाहिए’ जैसे नारों से नगर का वातावरण आंदोलित हो उठा।

प्रदर्शनकारियों ने शनिमंदिर से प्रारंभ कर गोराई रोड होते हुए सुकांतो मैदान तक संगठित रैली निकाली। कई शिक्षकगण न्याय की मांग करते हुए भावुक हो उठे, उनकी आंखों से अश्रुधारा बहने लगी, जबकि कुछ प्रदर्शनकारी मानसिक तनाव एवं भीषण गर्मी के कारण मूर्छित हो गए। उन्हें त्वरित चिकित्सकीय सहायता हेतु निकटवर्ती चिकित्सालय में भर्ती कराया गया।
ज्ञातव्य हो कि उच्चतम न्यायालय ने राज्य सरकार की शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया में गंभीर अनियमितता, पारदर्शिता की कमी एवं चयन में योग्यता की उपेक्षा को आधार बनाते हुए उक्त नियुक्तियों को अमान्य घोषित कर दिया। इस निर्णय ने न केवल सहस्त्रों शिक्षकों के भविष्य को अनिश्चितता के गर्त में ढकेल दिया है, अपितु समूची राज्य शिक्षा व्यवस्था को भी कठघरे में खड़ा कर दिया है।

प्रदर्शन कर रहे शिक्षकों की स्पष्ट मांग है कि— 1. सभी निष्कासित शिक्षकों की यथाशीघ्र पुनर्बहाली सुनिश्चित की जाए। 2. न्यायालय एवं सरकार इस प्रकरण का न्यायसंगत एवं स्थायी समाधान प्रस्तुत करें। 3. नियुक्ति प्रक्रिया में संलिप्त वास्तविक दोषियों पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए, शिक्षकों को बलि का बकरा न बनाया जाए।

इस पूरे घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति को और भी प्रखर बना दिया है। भाजपा, कांग्रेस एवं वाम दलों ने ममता बनर्जी नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस सरकार पर तीखे प्रहार करते हुए इस संकट को उनकी प्रशासनिक असफलता बताया है। वहीं, शिक्षा मंत्री ब्रात्य बसु ने सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय को ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ करार देते हुए शिक्षकों के हित में समाधान खोजने की प्रतिबद्धता प्रकट की है।
उक्त प्रदर्शन को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए। जिला निरीक्षक कार्यालय के बाहर रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) एवं पुलिस बल की भारी तैनाती की गई, साथ ही स्थिति पर निगरानी हेतु ड्रोन कैमरे का भी उपयोग किया गया।

फिलहाल, संपूर्ण राज्य में शिक्षकों का असंतोष निरंतर तीव्र होता जा रहा है। यक्षप्रश्न यह है कि क्या सरकार एवं न्यायपालिका इस संकट से उबरने का मार्ग प्रशस्त कर पाएंगे अथवा यह विवाद और अधिक जटिल रूप धारण करेगा?














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