

आसनसोल : बांग्ला नववर्ष पोइला बोइशाख के अवसर पर जहां पूरे पश्चिम बंगाल में उल्लास और सांस्कृतिक गरिमा का माहौल देखने को मिला, वहीं आसनसोल में एक अप्रत्याशित विवाद ने बंगाली समाज को दो धड़ों में बांट दिया। यह विवाद मशहूर स्कॉच ब्रांड ‘100 पाइपर’ की बोतलों पर रवींद्रनाथ टैगोर की सुप्रसिद्ध कविता ‘दुई पाखी’ की पंक्तियों को छापे जाने को लेकर उपजा।
नववर्ष के दिन जब लोग एक-दूसरे को शुभकामनाएं दे रहे थे और पारंपरिक मिठाइयों से खुशियाँ बाँट रहे थे, तब शराब दुकानों और बार में टैगोर की कविता से सजी बोतलों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं। कुछ लोगों ने इसे बंगाली साहित्य और संस्कृति से जुड़ाव का एक अनोखा माध्यम माना, तो कुछ इसे गंभीर अपमान और सांस्कृतिक अपवित्रता करार देने लगे।

बांगला पखो संगठन के पश्चिम बर्धमान जिला अध्यक्ष अखय बैनर्जी ने इस पर तीव्र आपत्ति जताते हुए कहा, “टैगोर बंगाल की आत्मा हैं। उनकी कविताओं को शराब की बोतलों पर छापना उनकी प्रतिष्ठा और हमारी सांस्कृतिक अस्मिता के साथ खिलवाड़ है।” उन्होंने ‘100 पाइपर’ ब्रांड को चेतावनी दी कि अगर जल्द ही इन बोतलों से कविता की पंक्तियां नहीं हटाई गईं, तो संगठन सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करेगा।

टैगोर की कविता ‘दुई पाखी’ दो पक्षियों—एक पिंजरे में बंद और दूसरा खुले आकाश में उड़ने वाले—की भावनात्मक बातचीत के माध्यम से स्वतंत्रता, बंधन और जीवन के मर्म को उजागर करती है। इसे शराब से जोड़ना कई लोगों को नैतिक और भावनात्मक रूप से अस्वीकार्य लगा।
अब सवाल यह उठ रहा है कि यह कदम ब्रांड मार्केटिंग की नई रणनीति थी या सांस्कृतिक असंवेदनशीलता का परिचायक। विवाद ने पूरे बंगाली समाज को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या हमारी सांस्कृतिक धरोहर का इस प्रकार व्यवसायिक उपयोग उचित है? फिलहाल, इस मुद्दे पर बहस जारी है और सबकी निगाहें कंपनी की अगली प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।















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