

आसनसोल : कैंसर से पीड़ित एक सेवानिवृत्त रेल कर्मचारी शंभु सिंह ने आसनसोल रेल अस्पताल पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि कई बार आवेदन देने के बावजूद उन्हें समुचित चिकित्सा सुविधा नहीं दी जा रही है। इस अन्यायपूर्ण व्यवहार के विरोध में अन्य रेलकर्मियों ने अस्पताल परिसर में विरोध प्रदर्शन कर प्रबंधन को घेर लिया।
प्राप्त विवरण के अनुसार, शंभु सिंह कोलकाता के एक निजी चिकित्सालय में परीक्षण के दौरान कैंसर से ग्रसित पाए गए थे। तत्पश्चात रेल प्रबंधन ने उन्हें टाटा मेमोरियल अस्पताल, मुंबई में इलाज के लिए भेजा। वहां प्रथम कीमोथेरेपी सफलतापूर्वक दी गई। किंतु दूसरी और तीसरी कीमोथेरेपी के लिए उन्हें बार-बार आसनसोल रेल अस्पताल का चक्कर काटना पड़ा, परंतु उन्हें कोई उत्तर नहीं मिला।

शंभु सिंह ने बताया कि उन्हें प्रत्येक 21 दिनों के अंतराल पर कीमोथेरेपी लेनी चाहिए थी, किंतु रेल अस्पताल की लापरवाही के कारण 42 दिन बीत चुके हैं और अब तक अगली कीमोथेरेपी नहीं मिल पाई है। चिकित्सकीय दृष्टि से यह अत्यंत गंभीर लापरवाही मानी जाती है, जिससे रोगी की जीवन रक्षा संकट में पड़ सकती है।
रेल अस्पताल की इस असंवेदनशीलता से क्षुब्ध होकर अन्य रेलकर्मियों ने शंभु सिंह की सहायता हेतु अस्पताल के समक्ष विरोध प्रदर्शन किया। दबाव बढ़ने पर अंततः अस्पताल प्रबंधन ने उपचार का आश्वासन दिया, परंतु आश्वासन मात्र से पीड़ित परिवार को राहत नहीं मिली है।

इस संदर्भ में जब रेल अस्पताल की मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. बीणा मरांडी से प्रतिक्रिया मांगी गई तो उन्होंने कोई उत्तर देने से इनकार कर दिया। वहीं जनसंपर्क अधिकारी बिप्लव बाउरी से भी संपर्क साधने का प्रयास किया गया, किंतु उन्होंने अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।

रेल कर्मियों ने मांग की है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच हो तथा शंभु सिंह को अविलंब पूर्ण चिकित्सा सुविधा प्रदान की जाए, ताकि भविष्य में किसी अन्य रेलकर्मी को इस प्रकार की पीड़ा का सामना न करना पड़े।














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